विशेष सत्र से पहले कैबिनेट विस्तार की तैयारी, NDA में नए सहयोगियों को साधने की कवायद – Uttaranchal Ratna
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विशेष सत्र से पहले कैबिनेट विस्तार की तैयारी, NDA में नए सहयोगियों को साधने की कवायद

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार सितंबर के मध्य के बाद संसद का दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। इस विशेष सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की योजना बताई जा रही है। सरकार की रणनीति केवल संसद के विशेष सत्र तक सीमित नहीं है। इससे पहले कैबिनेट विस्तार के जरिए एनडीए में शामिल होने के इच्छुक राजनीतिक दलों को साथ लाने की कोशिश भी की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक विशेष सत्र और कैबिनेट विस्तार को लेकर अंतिम स्तर की चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मध्य एशिया के दौरे से लौटने के बाद शुरू हो सकती है। सरकार ने विशेष सत्र का विकल्प खुला रखने के लिए मानसून सत्र के 15 दिन बीत जाने के बाद भी सत्रावसान नहीं किया है। सरकार के सामने फिलहाल दो बड़े राजनीतिक मुद्दे बताए जा रहे हैं। पहला, एनसीपी के दोनों धड़ों के बीच विलय और दूसरा, तमिलनाडु की सत्तारूढ़ डीएमके को एनडीए के साथ लाने की संभावना। सूत्रों का दावा है कि दोनों मामलों में बातचीत अंतिम दौर में है। सरकार की कोशिश है कि कैबिनेट विस्तार से पहले एनसीपी के दोनों धड़ों के बीच विलय की प्रक्रिया आगे बढ़े और डीएमके भी केंद्र सरकार के साथ आने पर सहमत हो। परिसीमन के मुद्दे पर सरकार की ओर से डीएमके को एक अहम आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि राज्यों की लोकसभा सीटों में आनुपातिक आधार पर करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रावधान प्रस्तावित विधेयक के मसौदे में शामिल करने का आश्वासन दिया गया है। एनसीपी के दोनों धड़ों के विलय को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस लगातार बातचीत कर रहे हैं। इस संबंध में हुई प्रगति की जानकारी प्रधानमंत्री मोदी को उनके विदेश दौरे से लौटने के बाद दी जाएगी।

विशेष सत्र को लेकर सरकार की नजर मुख्य रूप से डीएमके के रुख पर है। एनसीपी-एसपी समेत कुछ अन्य दलों के समर्थन को लेकर सरकार अपेक्षाकृत आश्वस्त बताई जा रही है, लेकिन परिसीमन से जुड़े संवैधानिक संशोधन को पारित कराने के लिए व्यापक समर्थन की जरूरत होगी। डीएमके के पास लोकसभा में 22 और राज्यसभा में 8 सांसद हैं। ऐसे में पार्टी का रुख संसद में किसी भी बड़े संवैधानिक विधेयक के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। सूत्रों के अनुसार डीएमके के साथ केवल परिसीमन को लेकर ही बातचीत नहीं हो रही, बल्कि एनडीए में शामिल होने और केंद्र की कैबिनेट में प्रतिनिधित्व देने जैसे राजनीतिक विकल्पों पर भी चर्चा चल रही है। अगर डीएमके की सहमति बनती है तो विशेष सत्र और कैबिनेट विस्तार दोनों की रूपरेखा तेजी से आगे बढ़ सकती है। इससे केंद्र की राजनीति के साथ-साथ तमिलनाडु की सियासत में भी नए समीकरण बनने की संभावना होगी। इसी बीच केंद्र सरकार ने देश में मध्यस्थता व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है। कानून बनने के करीब तीन साल बाद केंद्र ने मध्यस्थता परिषद का गठन कर दिया है। केंद्रीय कानून मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में 2023 के मध्यस्थता अधिनियम के तहत मध्यस्थता परिषद के गठन की जानकारी दी गई। परिषद का उद्देश्य देश में संस्थागत मध्यस्थता व्यवस्था को व्यवस्थित और नियंत्रित करना होगा। मध्यस्थता परिषद को मध्यस्थता सेवाएं उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं को मान्यता देने की जिम्मेदारी भी दी गई है।

इसके अलावा मध्यस्थता के क्षेत्र में प्रशिक्षण और प्रमाणन देने वाले संस्थानों की मान्यता भी परिषद के कार्यक्षेत्र में होगी। कानून एवं कार्मिक मंत्रालय से जुड़ी स्थायी समिति ने हाल ही में भारत की मध्यस्थता व्यवस्था को लेकर अपनी रिपोर्ट संसद में पेश की थी। समिति ने मध्यस्थता परिषद के गठन को इस व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए महत्वपूर्ण माना था। इस परिषद के गठन में देरी को लेकर पिछले साल अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने मानव संसाधनों की कमी और वैधानिक संस्थाओं के लिए योग्य उम्मीदवार तलाशने में आने वाली कठिनाइयों को एक कारण बताया था। मध्यस्थता परिषद से जुड़े शुरुआती प्रावधानों की अधिसूचना 9 अक्टूबर 2023 को जारी की गई थी। इसके बाद परिषद की संरचना और सदस्यों की सेवा शर्तों से जुड़े नियम भी लागू किए गए। सरकार की कोशिश अब देश में विवादों के समाधान के लिए मध्यस्थता व्यवस्था को अधिक प्रभावी और संस्थागत बनाने की है। इस कदम से अदालतों पर लंबित मामलों का बोझ कम करने और वैकल्पिक विवाद समाधान व्यवस्था को मजबूत करने की उम्मीद है। एक तरफ सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे बड़े राजनीतिक मुद्दों को लेकर विशेष सत्र की संभावनाओं पर मंथन कर रही है, वहीं दूसरी ओर एनडीए के विस्तार और कैबिनेट में संभावित बदलाव को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। आने वाले दिनों में डीएमके और एनसीपी से जुड़ी बातचीत इन दोनों फैसलों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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