विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए संकेत? गढ़वाल विवि में ABVP की बड़ी हार – Uttaranchal Ratna
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विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए संकेत? गढ़वाल विवि में ABVP की बड़ी हार

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में जय हो संगठन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ABVP को बड़ा झटका दिया है। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद विश्वविद्यालय परिसर की छात्र राजनीति में नए समीकरण बनते नजर आ रहे हैं। अध्यक्ष पद पर जय हो संगठन के प्रत्याशी हिमांशु भंडारी ने बड़ी जीत दर्ज की है। हिमांशु भंडारी को कुल 3301 वोट मिले, जबकि ABVP के प्रत्याशी भुवन चमोली को 1796 मत प्राप्त हुए। हिमांशु भंडारी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भुवन चमोली को 1505 मतों के बड़े अंतर से हराकर अध्यक्ष पद अपने नाम किया। इस जीत के साथ जय हो संगठन ने विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।

वहीं महासचिव/सचिव पद पर भी जय हो संगठन के मयंक बहुगुणा ने जीत हासिल की है। इस तरह छात्रसंघ के महत्वपूर्ण पदों पर जय हो खेमे का प्रभाव देखने को मिला है। गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय को लंबे समय से ABVP के मजबूत प्रभाव वाले छात्र राजनीति के केंद्र के तौर पर देखा जाता रहा है। ऐसे में अध्यक्ष पद पर ABVP प्रत्याशी की बड़ी हार को संगठन के लिए महत्वपूर्ण झटका माना जा रहा है। चुनाव परिणाम के बाद विश्वविद्यालय परिसर में जय हो और NSUI खेमे का प्रभाव बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। नतीजों ने छात्र राजनीति में ABVP के सामने नई चुनौती भी खड़ी कर दी है। इस चुनाव को केवल विश्वविद्यालय परिसर की राजनीति तक सीमित नहीं माना जा रहा है। गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय का प्रभाव श्रीनगर क्षेत्र की राजनीति से भी जुड़ा हुआ है और यहां के छात्रसंघ चुनाव के परिणामों पर राजनीतिक दलों की भी नजर रहती है।

श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र भाजपा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां से धन सिंह रावत भाजपा विधायक होने के साथ-साथ धामी सरकार में मंत्री भी हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय में ABVP के प्रदर्शन को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए एक राजनीतिक संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि छात्रसंघ चुनाव के परिणामों को सीधे विधानसभा चुनाव के नतीजों से जोड़ना जल्दबाजी होगी। इसके बावजूद कैंपस की राजनीति में बदले समीकरणों ने उत्तराखंड की सियासत में चर्चा जरूर बढ़ा दी है। जय हो संगठन और NSUI के प्रदर्शन के बाद आने वाले दिनों में विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में इन संगठनों की सक्रियता और बढ़ने की संभावना है। वहीं ABVP के लिए यह परिणाम अपने संगठनात्मक प्रदर्शन की समीक्षा करने का मौका माना जा रहा है।

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