मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) ने राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में अवैध निर्माण और अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ अब तक का सबसे निर्णायक और ऐतिहासिक अभियान छेड़ दिया है। प्राधिकरण ने स्पष्ट कर दिया है कि अब नियम तोड़ने वालों के लिए देवभूमि में कोई जगह नहीं है।
आंकड़ों में MDDA की बड़ी स्ट्राइक MDDA के इस व्यापक अभियान के तहत अब तक लगभग 10,000 बीघा भूमि पर की गई अवैध प्लॉटिंग को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया है। इसके साथ ही, प्राधिकरण की टीमों ने मानकों का उल्लंघन करने वाले 1000 से अधिक अवैध निर्माणों को सील कर दिया है। यह कार्रवाई उत्तराखंड के शहरी विकास के इतिहास में सबसे बड़ी मानी जा रही है।
उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी का ‘जीरो टॉलरेंस’ मॉडल MDDA के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के नेतृत्व में प्राधिकरण ने अवैध गतिविधियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा, “अवैध निर्माण का मतलब तयशुदा ध्वस्तीकरण है।” उपाध्यक्ष ने साफ किया कि अवैध कॉलोनियां न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि ये भविष्य में जलभराव, ट्रैफिक जाम और आपदा जैसी समस्याओं का मुख्य कारण बनती हैं। अब फील्ड निरीक्षण और तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर हर दिन कार्रवाई की जा रही है।
इन इलाकों में चला प्राधिकरण का हंटर MDDA की सबसे अधिक कार्रवाई विकासनगर, सहसपुर, सेलाकुई, हरबर्टपुर, शिमला बाईपास, प्रेमनगर और सहस्रधारा रोड पर हुई है। इसके अलावा डोईवाला क्षेत्र के भानियावाला, रानीपोखरी, लालतप्पड़, थानो रोड और रायपुर-धर्मपुर जैसे इलाकों में भी अवैध प्लॉटिंग को जड़ से साफ किया गया है।
जनता के लिए विशेष अपील सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य नियोजित विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि किसी भी भू-माफिया के झांसे में आकर अपनी मेहनत की कमाई न फंसाएं। कोई भी प्लॉट खरीदने या निर्माण कार्य शुरू करने से पहले MDDA से विधिवत अनुमति और नक्शा पास जरूर कराएं, वरना होने वाले आर्थिक नुकसान के जिम्मेदार वे खुद होंगे।