उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय सेना के पूर्व मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (BC Khanduri) का 19 मई को निधन हो गया। लंबे समय से बीमार चल रहे बीसी खंडूरी ने देहरादून के मैक्स अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक, सामाजिक और सैन्य जगत से जुड़े लोग लगातार उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। इसी बीच उनकी बेटी और उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतू खंडूरी ने पिता को याद करते हुए बेहद भावुक पोस्ट साझा किया है। ऋतू खंडूरी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि आज शब्द उनका साथ नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल अपने पिता को नहीं खोया, बल्कि अपने जीवन के सबसे बड़े संबल, मार्गदर्शक और उस व्यक्तित्व को विदा किया है जिसकी छाया में उन्होंने ईमानदारी, अनुशासन, कर्तव्यपरायणता और राष्ट्र सेवा का वास्तविक अर्थ समझा।
उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी का जीवन किसी एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति सम्पूर्ण समर्पण की एक जीवंत गाथा था। 1 अक्टूबर 1934 से शुरू हुई उनकी जीवन यात्रा भारतीय सेना के रणक्षेत्रों से लेकर लोकतंत्र के सर्वोच्च मंचों और उत्तराखंड की जनसेवा तक पहुंची, लेकिन हर भूमिका में उनकी पहचान सिर्फ “राष्ट्र प्रथम” की रही।
ऋतू खंडूरी ने लिखा कि उनके लिए पिता की सबसे बड़ी पहचान कोई पद या सम्मान नहीं था, बल्कि वे एक ऐसे इंसान थे जो कम बोलते थे लेकिन अपने सिद्धांतों और मूल्यों पर हमेशा अडिग रहते थे। बाहर से कठोर दिखने वाले बीसी खंडूरी भीतर से बेहद संवेदनशील व्यक्ति थे। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने उन्हें सिखाया कि जीवन में ईमानदारी सबसे बड़ी पूंजी होती है और किसी भी पद की असली गरिमा व्यक्ति के आचरण से तय होती है। उन्होंने यह भी लिखा कि सार्वजनिक जीवन में फैसले लोकप्रिय होने के लिए नहीं, बल्कि सही होने के लिए लिए जाने चाहिए।

ऋतू खंडूरी ने अपने पोस्ट में आगे लिखा कि पिता का जाना उनके और पूरे परिवार के लिए ऐसी रिक्तता है जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। हालांकि उन्हें इस बात का संतोष रहेगा कि बीसी खंडूरी ने अपना सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र और समाज के प्रति ईमानदार दायित्व निभाते हुए जिया। उन्होंने भावुक शब्दों में लिखा, “पिताजी, आपने हमें केवल जीवन नहीं दिया, बल्कि जीवन जीने के मूल्य दिए। आपका अनुशासन, आपका साहस, आपकी सत्यनिष्ठा और आपकी सीख सदैव हमारा मार्गदर्शन करती रहेगी।” भुवन चंद्र खंडूरी को उत्तराखंड की राजनीति में एक ईमानदार, अनुशासित और सख्त प्रशासनिक छवि वाले नेता के रूप में याद किया जाता है। भारतीय सेना में 35 वर्षों तक सेवा देने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने।