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पंजाब सरकार ने कहा- अब EVM इस्तेमाल संभव नहीं

पंजाब में 26 मई को होने वाले निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलचल तेज हो गई है। चुनाव बैलेट पेपर से कराने के फैसले पर बुधवार को Punjab State Election Commission को Punjab and Haryana High Court में कड़े सवालों का सामना करना पड़ा। मामले की सुनवाई के दौरान ईवीएम को लेकर पंजाब सरकार, राज्य चुनाव आयोग और भारतीय निर्वाचन आयोग आमने-सामने नजर आए।

पंजाब राज्य चुनाव आयोग ने पहले कोर्ट में कहा था कि उन्होंने चुनाव के लिए ईवीएम की मांग की थी, लेकिन भारतीय निर्वाचन आयोग की ओर से मशीनें उपलब्ध नहीं करवाई गईं। हालांकि बुधवार की सुनवाई में Election Commission of India ने इस दावे पर जवाब देते हुए कहा कि पंजाब से आवश्यक जानकारी और डिमांड समय पर नहीं मिली थी, जिसके कारण प्रक्रिया में देरी हुई।

सुनवाई के दौरान केंद्रीय चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि ईवीएम उपलब्ध कराने की प्रक्रिया काफी पहले शुरू करनी पड़ती है। आयोग ने यह भी कहा कि यदि हाईकोर्ट आदेश देता है तो दो से तीन दिनों के भीतर पड़ोसी राज्यों से मशीनें लेकर ईवीएम उपलब्ध करवाई जा सकती हैं।

वहीं पंजाब सरकार की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि निकाय चुनाव 26 मई को प्रस्तावित हैं और ईवीएम के इस्तेमाल के लिए कम से कम 17 से 18 दिन पहले तैयारी जरूरी होती है। सरकार ने कहा कि मौजूदा समय में ईवीएम का इस्तेमाल व्यावहारिक नहीं है। राज्य सरकार और चुनाव आयोग की ओर से समय पर प्रक्रिया शुरू किए जाने का दावा करते हुए कोर्ट में संबंधित पत्राचार का हवाला भी दिया गया।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई वीरवार तक स्थगित कर दी। अब सभी की नजरें कोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यह फैसला चुनाव प्रक्रिया को सीधे प्रभावित कर सकता है।

यह मामला तब और चर्चा में आया जब मोहाली निवासी रुचिता गर्ग ने जनहित याचिका दाखिल कर स्थानीय निकाय चुनाव बैलेट पेपर की बजाय ईवीएम से कराने की मांग की। याचिका में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि चुनाव प्रणाली को फिर से बैलेट पेपर पर ले जाना व्यावहारिक नहीं है।

याचिकाकर्ता पक्ष ने कोर्ट को बताया कि पंजाब कानून की धारा 64 में यह स्पष्ट है कि जहां बैलेट बॉक्स या बैलेट पेपर का उल्लेख है, वहां ईवीएम को भी शामिल माना जाएगा। इससे पहले मंगलवार को हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग से सवाल किया था कि जब देशभर में चुनाव ईवीएम से हो रहे हैं तो पंजाब में निकाय चुनाव बैलेट पेपर से क्यों कराए जा रहे हैं।

पंजाब निकाय चुनाव को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर बड़ा मुद्दा बन चुका है। चुनाव की तारीख नजदीक होने के कारण प्रशासन और राजनीतिक दलों की चिंता भी बढ़ गई है।

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