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पंजाब में 2.14 करोड़ मतदाताओं का होगा सत्यापन, चुनाव आयोग ने शुरू किया अभियान

पंजाब में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया आज से औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। चुनाव आयोग द्वारा शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य राज्य की मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और अद्यतन बनाना है। इसके तहत बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे और उन्हें एन्यूमरेशन फॉर्म उपलब्ध कराएंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी पात्र मतदाताओं के लिए यह फॉर्म भरना बेहद जरूरी होगा, क्योंकि इसी आधार पर उनके नाम मतदाता सूची में बनाए रखने या अपडेट करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) अनिंदिता मित्रा ने बताया कि अभियान के पहले चरण में बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं को फॉर्म वितरित करेंगे। इसके साथ ही वे लोगों को फॉर्म भरने में सहायता भी देंगे ताकि किसी प्रकार की त्रुटि न हो। इसके बाद बीएलओ दोबारा संबंधित घरों में जाकर भरे हुए फॉर्म एकत्र करेंगे। यह पूरी प्रक्रिया 25 जून से 24 जुलाई तक चलेगी।

चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी घर से पहली बार में फॉर्म प्राप्त नहीं होता है तो संबंधित बीएलओ वहां अधिकतम तीन बार तक जा सकता है। प्रत्येक दौरे का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा और घर पर एक सूचना स्टिकर भी लगाया जाएगा ताकि संबंधित परिवार को प्रक्रिया की जानकारी मिल सके और कोई पात्र मतदाता छूट न जाए।

इस राज्यव्यापी अभियान के लिए पंजाब भर में 24,453 बूथ लेवल अधिकारियों की तैनाती की गई है। ये अधिकारी राज्य के 2.14 करोड़ से अधिक मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। आयोग के अनुसार अब तक लगभग 1.84 करोड़ मतदाताओं यानी 86.02 प्रतिशत की प्री-मैपिंग पूरी की जा चुकी है, जबकि करीब 30 लाख मतदाताओं की मैपिंग अभी शेष है। इसी अवधि के दौरान मतदान केंद्रों के रेशनलाइजेशन का कार्य भी पूरा किया जाएगा।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया को लेकर सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ कई दौर की बैठकें की जा चुकी हैं। दलों द्वारा दिए गए सुझावों को भी प्रक्रिया में शामिल किया गया है। साथ ही सभी निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को निर्देश दिए गए हैं कि वे बीएलओ से नियमित फीडबैक लेते रहें और अभियान की निगरानी करें।

चुनाव आयोग के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशन 3 अगस्त 2026 को किया जाएगा। इसके बाद 3 अगस्त से 2 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर मिलेगा। इस दौरान यदि किसी व्यक्ति का नाम सूची में नहीं मिलता है या किसी जानकारी में त्रुटि होती है तो वह आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन कर सकता है। प्राप्त दावों और आपत्तियों का निपटारा 28 सितंबर तक किया जाएगा, जबकि अंतिम मतदाता सूची 1 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी।

सीईओ अनिंदिता मित्रा ने बताया कि यदि किसी पात्र मतदाता की मैपिंग घर-घर सर्वे के दौरान नहीं हो पाती है तो उसे दावे और आपत्तियों की अवधि के दौरान नोटिस जारी किया जाएगा। इसके बाद संबंधित व्यक्ति अपने दस्तावेज जमा कर मतदाता सूची में नाम शामिल करा सकेगा। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा।

चुनाव आयोग ने मतदाता पंजीकरण को लेकर भी सख्त चेतावनी जारी की है। आयोग के अनुसार यदि कोई व्यक्ति एक से अधिक स्थानों पर मतदाता के रूप में पंजीकृत पाया जाता है तो यह कानूनन अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है और उसे एक वर्ष तक की सजा भी हो सकती है। आयोग ने कहा है कि इस प्रकार के मामलों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।

चुनाव आयोग का मानना है कि इस विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के जरिए मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाया जा सकेगा, जिससे भविष्य में होने वाले चुनावों को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने में मदद मिलेगी। फिलहाल राज्यभर में इस अभियान की शुरुआत हो चुकी है और आने वाले एक महीने तक बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे।

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