
रुद्रप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारा से जुड़े निहंग विवाद ने अब राजनीतिक रंग लेना शुरू कर दिया है। क्षेत्रीय राजनीतिक दल उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने इस मामले को लेकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को रुद्रप्रयाग के गुलाबराय मैदान में आयोजित जनसभा के माध्यम से यूकेडी नेताओं ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और नगरासू गुरुद्वारा में कथित रूप से चार दिनों तक चले घटनाक्रम पर कानूनी कार्रवाई न होने को लेकर नाराजगी जताई।
जनसभा में बड़ी संख्या में यूकेडी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ रुद्रप्रयाग, पौड़ी और कर्णप्रयाग क्षेत्रों से आए स्थानीय लोग भी शामिल हुए। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि नगरासू गुरुद्वारा में कई दिनों तक विवाद और हंगामे की स्थिति बनी रही, लेकिन इसके बावजूद संबंधित लोगों के खिलाफ कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और किसी भी मामले में निष्पक्ष कार्रवाई जरूरी है।
यूकेडी नेताओं ने कहा कि स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि पूरे घटनाक्रम के दौरान प्रशासन की भूमिका सवालों के घेरे में रही। उनका आरोप है कि यदि किसी अन्य मामले में ऐसी स्थिति बनती तो तत्काल कार्रवाई की जाती, लेकिन इस मामले में प्रशासन ने नरमी दिखाई। जनसभा में मौजूद लोगों ने सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की।
वहीं दूसरी ओर यूकेडी के इस आंदोलन और विरोध प्रदर्शन पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी करते हुए कहा कि कुछ लोग उत्तराखंड की चारधाम यात्रा और हेमकुंड साहिब यात्रा को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति या संगठन राज्य के धार्मिक पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करेगा तो उसे जनता का विरोध झेलना पड़ेगा।
महेंद्र भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा पर्यटन पर आधारित है। होटल व्यवसायी, टैक्सी संचालक, दुकानदार और पर्यटन से जुड़े हजारों परिवार यात्राओं पर निर्भर हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की गतिविधि जो धार्मिक यात्रा या पर्यटन को प्रभावित करे, राज्यहित के खिलाफ मानी जाएगी।
भट्ट ने आगे कहा कि सरकार किसी को भी धार्मिक या क्षेत्रीय उन्माद फैलाने की अनुमति नहीं दे सकती। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे राज्य की सामाजिक एकता और पर्यटन हितों की रक्षा के लिए सजग रहें। साथ ही प्रशासन से भी अनुरोध किया कि ऐसे तत्वों पर नजर रखी जाए जो राज्य के धार्मिक पर्यटन को प्रभावित करने का प्रयास कर सकते हैं।
फिलहाल नगरासू गुरुद्वारा से जुड़ा यह विवाद केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है। एक ओर यूकेडी प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा इसे धार्मिक पर्यटन और सामाजिक सौहार्द से जोड़कर देख रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।