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हरिद्वार और उत्तरकाशी की बालिकाओं के खातों में पहुंची योजना की राशि

उत्तराखंड सरकार की महत्वाकांक्षी नंदा गौरा योजना के तहत गुरुवार को हरिद्वार और उत्तरकाशी जिले की 4098 पात्र बालिकाओं को बड़ी राहत मिली। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से लाभार्थी बालिकाओं के बैंक खातों में लगभग 19.23 करोड़ रुपये की धनराशि हस्तांतरित की। इस कदम से उन बालिकाओं को योजना का लाभ मिल सका, जिनकी औपचारिक प्रक्रियाएं पहले समय पर पूरी नहीं हो पाई थीं।

मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश की 33,251 पात्र बालिकाओं को 26 फरवरी को ही नंदा गौरा योजना का लाभ प्रदान कर दिया गया था। हालांकि हरिद्वार और उत्तरकाशी जिले की कुछ बालिकाओं के दस्तावेजों का सत्यापन, आवश्यक औपचारिकताएं और जिला स्तरीय समिति से अनुमोदन की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी थी। इसी कारण उन्हें उस समय योजना का लाभ नहीं मिल पाया था।

उन्होंने बताया कि सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद गुरुवार को देहरादून स्थित यमुना कॉलोनी कैंप कार्यालय से इन 4098 बालिकाओं के खातों में सहायता राशि भेजी गई। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि प्रदेश की कोई भी पात्र बेटी सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे और प्रत्येक जरूरतमंद बालिका तक सहायता समय पर पहुंचे।

रेखा आर्या ने कहा कि नंदा गौरा योजना केवल आर्थिक सहायता देने की योजना नहीं है, बल्कि यह बेटियों की शिक्षा, आत्मनिर्भरता और उज्ज्वल भविष्य को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। योजना के तहत लाभान्वित हुई 4098 बालिकाओं में 417 नवजात बालिकाएं शामिल हैं, जिन्हें जन्म के समय सहायता राशि प्रदान की गई है। इसके अलावा 3681 ऐसी छात्राएं भी लाभार्थियों में शामिल हैं जिन्होंने 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए स्नातक स्तर में प्रवेश लिया है।

मंत्री ने बताया कि उत्तराखंड सरकार लगातार बेटियों के सशक्तिकरण और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है। नंदा गौरा योजना इसी सोच का हिस्सा है, जिसके माध्यम से परिवारों को बेटियों की शिक्षा और विकास के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान किया जाता है।

गौरतलब है कि वर्ष 2017-18 से लेकर 2025-26 तक नंदा गौरा योजना के तहत प्रदेश की कुल 4,11,035 बालिकाओं को लाभान्वित किया जा चुका है। इस अवधि में लगभग 1314 करोड़ रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी गई है। योजना ने हजारों परिवारों को आर्थिक संबल देने के साथ-साथ बेटियों की शिक्षा और भविष्य को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

सरकार का मानना है कि ऐसी योजनाएं समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी साबित हो रही हैं। आने वाले समय में भी पात्र बालिकाओं को समयबद्ध तरीके से योजना का लाभ उपलब्ध कराने के लिए विशेष प्रयास जारी रहेंगे।

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