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करीब 30 साल से बंद सीमेंट फैक्टरी की जमीन पर होगा बड़ा विकास, सरकार ने बनाई योजना

चरखी दादरी में करीब तीन दशक से बंद पड़ी सीमेंट फैक्टरी की 200 एकड़ जमीन के दिन अब बदलने वाले हैं। सरकार ने इस जमीन को औद्योगिक गतिविधियों का केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने यहां रिहायशी कॉलोनी विकसित करने के बजाय जिले की पहली इंडस्ट्रीयल टाउनशिप विकसित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए। यह जमीन सीमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) की है। पहले इस जमीन पर रिहायशी कॉलोनी विकसित करने का प्रस्ताव था, लेकिन मास्टर प्लान में जमीन का भू-उपयोग औद्योगिक क्षेत्र के रूप में दर्ज है। ऐसे में जमीन का लैंड यूज बदलने की प्रक्रिया में करीब दो साल का समय लग सकता था। सरकार ने इस लंबी प्रक्रिया से बचने के लिए मौजूदा भू-उपयोग के अनुसार ही यहां इंडस्ट्रीयल टाउनशिप विकसित करने का विकल्प चुना है। प्रस्तावित टाउनशिप का विकास हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं आधारभूत संरचना विकास निगम यानी HSIIDC की ओर से किया जाएगा। परियोजना में केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय और HSIIDC की 50-50 फीसदी हिस्सेदारी प्रस्तावित है। HSIIDC की ओर से टाउनशिप के लिए जरूरी आधारभूत ढांचे और मूलभूत सुविधाओं का विकास किया जाएगा। डीपीआर में जमीन की स्थिति, इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश की संभावनाओं और परियोजना की विकास लागत का विस्तृत आकलन किया जाएगा। परियोजना से होने वाले मुनाफे में भी केंद्र और HSIIDC की 50-50 फीसदी हिस्सेदारी प्रस्तावित है। अंतिम रूप से परियोजना का स्वरूप और निवेश से जुड़ी तस्वीर डीपीआर तैयार होने के बाद और स्पष्ट होगी। इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी लोकेशन मानी जा रही है। करीब 200 एकड़ जमीन दादरी रेलवे स्टेशन के नजदीक स्थित है और 152D एक्सप्रेस-वे से भी इसकी कनेक्टिविटी है।

रेलवे और एक्सप्रेस-वे की नजदीकी के कारण यहां स्थापित होने वाली औद्योगिक इकाइयों को माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स की बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे भविष्य में उद्योगों के लिए यह क्षेत्र आकर्षक डेस्टिनेशन बन सकता है। सरकार आसपास की जमीन को भविष्य में भू-मालिकों से खरीदकर टाउनशिप का विस्तार करने पर भी विचार कर रही है। अगर यह योजना आगे बढ़ती है तो औद्योगिक क्षेत्र का आकार बढ़ाया जा सकता है। टाउनशिप के विस्तार से छोटे और मध्यम उद्योगों के साथ बड़े औद्योगिक निवेश के लिए भी अतिरिक्त जमीन उपलब्ध हो सकेगी। इससे क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। सरकार प्रदेश में नई इंडस्ट्रीयल टाउनशिप और इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग टाउनशिप विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है। आमतौर पर आईएमटी के लिए करीब 1500 एकड़ जमीन की आवश्यकता होती है। इसके मुकाबले इंडस्ट्रीयल टाउनशिप को अपेक्षाकृत कम क्षेत्र में विकसित किया जा सकता है। इसी वजह से चरखी दादरी की 200 एकड़ जमीन को इस मॉडल के लिए उपयुक्त माना गया है।

इस जमीन के इस्तेमाल को लेकर कवायद हालांकि नई नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के कार्यकाल से ही बंद पड़ी सीमेंट फैक्टरी की जमीन पर रिहायशी कॉलोनी विकसित करने की योजना पर काम चल रहा था। इस प्रस्ताव को लेकर केंद्रीय स्तर पर भी प्रयास किए गए थे। हालांकि जमीन के मौजूदा औद्योगिक भू-उपयोग और लैंड यूज बदलने में लगने वाले समय को देखते हुए अब सरकार ने औद्योगिक टाउनशिप का विकल्प चुना है। चरखी दादरी के विधायक सुनील सतपाल सांगवान ने मुख्यमंत्री के सामने इस जमीन पर इंडस्ट्रीयल टाउनशिप विकसित करने की मांग रखी थी। मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए अधिकारियों को डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए हैं। डीपीआर तैयार होने के बाद परियोजना की लागत, संभावित निवेश, आधारभूत ढांचे और टाउनशिप में विकसित की जाने वाली औद्योगिक गतिविधियों को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी। माना जा रहा है कि परियोजना के सिरे चढ़ने पर चरखी दादरी में औद्योगिक विकास को नई गति मिल सकती है।

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