देवभूमि उत्तराखंड का हिमालयी क्षेत्र अनंत रहस्यों की शरणस्थली है। हिंदू धर्मग्रंथों में वर्णित हिमालय के आठ ‘ॐ’ पर्वतों में से अब तक केवल दो की ही प्रामाणिक पहचान हो सकी है। इन पर्वतों की सबसे बड़ी विशेषता इनकी प्राकृतिक बनावट है, जहाँ बर्फ गिरने पर साक्षात ‘ॐ’ की आकृति उभर आती है। यह न केवल श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था का केंद्र है, बल्कि भूगोलवेत्ताओं के लिए भी एक अनसुलझा प्राकृतिक कौतूहल है।
1. ब्यास घाटी का प्रसिद्ध ‘ॐ पर्वत’
ब्यास घाटी में नावीढांग के समीप स्थित यह पर्वत दुनिया भर में सबसे अधिक प्रसिद्ध है। यहाँ जब बर्फ गिरती है, तो पर्वत की काली चट्टानों के बीच सफेद बर्फ से ‘ॐ’ का स्वरूप इतना स्पष्ट होता है कि श्रद्धालु इसे ईश्वरीय चमत्कार मानते हैं। वर्षों से यह क्षेत्र आदि कैलाश यात्रा का मुख्य आकर्षण रहा है।
2. दारमा घाटी का ‘नागलिंग ॐ पर्वत’
दूसरा ओम पर्वत दारमा घाटी के नागलिंग गाँव के पास स्थित है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार:
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इस पर्वत की जड़ में नाग की आकृति है, जिस कारण गाँव का नाम नागलिंग पड़ा।
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इसके उत्तर में भव्य पंचाचूली पर्वत शृंखला स्थित है।
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यहाँ के वयाशी बुग्याल से इसके दिव्य दर्शन होते हैं।
बर्फ का खेल और आकृति का रहस्य: ग्रामीणों का अनुभव है कि जब बर्फ कम होती है, तो ‘ॐ’ की आकृति और भी बड़ी और स्पष्ट दिखाई देती है। अधिक हिमपात होने पर यह आकृति कुछ छोटी नजर आने लगती है।
दारमा गाँव का अनोखा चमत्कार: दिन में 7 बार सूर्योदय!
इसी क्षेत्र के दारमा गाँव में एक विस्मयकारी खगोलीय घटना होती है। दिसंबर से अप्रैल के बीच, जब सूर्य उत्तरायण की ओर बढ़ता है, तो पहाड़ों की ऊँचाई के कारण गाँव में सात बार सूर्य छिपता और निकलता है। यानी एक ही दिन में सात बार सूर्योदय और सूर्यास्त जैसा नजारा दिखता है। इसी विचित्रता और कड़ाके की ठंड के कारण ग्रामीण सर्दियों में निचली घाटियों की ओर प्रवास (Migration) कर जाते हैं।
शेष 6 ‘ॐ’ पर्वतों की तलाश: आध्यात्मिक पर्यटन की नई राह
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार हिमालय में कुल आठ ऐसे पर्वत हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शेष 6 पर्वतों को खोजने के लिए सैटेलाइट सर्वे और वैज्ञानिक शोध की आवश्यकता है। यदि इन छिपे हुए रत्नों की खोज हो जाती है, तो उत्तराखंड का आध्यात्मिक पर्यटन वैश्विक मानचित्र पर एक नई ऊंचाई हासिल करेगा।