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अर्धकुंभ को लेकर संत समाज में मतभेद तेज, अखाड़ा परिषद ने आरोपों को बताया वर्चस्व की लड़ाई

अर्धकुंभ को पूर्णकुंभ या महाकुंभ की संज्ञा देकर शासन और प्रशासन जहां तैयारियों में जुटा है, वहीं अखाड़े और आश्रम से कुछ लोग समय-समय पर बयान जारी कर पूरी तैयारी को असमंजस में डाल रहे हैं। इससे न केवल मेला प्रशासन सकते में आ रहा है, बल्कि तरह-तरह की चर्चाएं भी आम हो रही हैं।बता दें कि बीते दिनों एक अखाड़े के शीर्ष संत ने अपने बयान में कुंभ की तैयारियों पर सवाल उठाए तो प्रशासन ने घूम-घूमकर सभी अखाड़ों के संतों का वीडियो बयान बनाकर वायरल किया। यह प्रयास उस संत के बयान का खंडन करना बताया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें न तो वार्ता के लिए बुलाया गया और न ही कोई चर्चा की गई। अब फिर से एक आश्रम में साधु समाज की बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता और संचालन करते हुए संत, महंत ने खुद की उपेक्षा बताते हुए कुंभ को लेकर प्रतिक्रिया व्यक्त की। यही नहीं इस बैठक में अखाड़ा परिषद के अस्तित्व पर भी सवाल खड़े किए गए। आरोप-प्रत्यारोप और आपत्ति का दौर इस आरोप-प्रत्यारोप और आपत्ति के बीच बृहस्पतिवार को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद व मां मनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष सामने आए। उन्होंने वीडियो बयान जारी करते हुए न केवल उन लोगों पर हमला बोला जो कुंभ पर सवाल खड़े कर रहे हैं, बल्कि उन्होंने इसे वर्चस्व की लड़ाई बता दी। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि अर्धकुंभ को महाकुंभ के रूप में आयोजित करने के लिए शासन को पूरा सहयोग संत समाज दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि यह मेला प्रयाग की तरह भव्य और दिव्य होगा। श्रीमहंत ने जारी वीडियो में कहा कि कुंभ मेला आयोजन में वह संत समाज और सभी अखाड़ों के साथ समन्वय बनाकर सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हरिद्वार कुंभ मेला दिव्य और भव्य रूप से संपन्न होगा। कुछ संतों की टिप्पणी और आलोचना को लेकर उन्होंने अपने बयान में कहा कि जो लोग कुंभ और अर्द्धकुंभ को लेकर विवाद कर रहे हैं वह सनातन का विरोध कर रहे हैं। केवल व्यवस्था और अपनी सुविधा हासिल करने के लिए रचा जा रहा कुचक्र अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष व मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने कहा कि प्रयाग में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कुंभ का आयोजन किया गया। भव्य और दिव्य स्वरूप देखकर ही हरिद्वार में आयोजन की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ चंद दिनों से संत का वेष धारण करने वाले केवल अपनी सुविधा और व्यवस्था पाने की कोशिश में हैं। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कुचक्र प्रमुख अखाड़ों के संत, महंत और शासन भी समझ चुका है जो सनातन संस्कृति के उत्थान में अवरोध उत्पन्न करना चाहते हैं। प्रत्येक बैठक में शामिल हो रहे हैं प्रमुख अखाड़ों के दो शीर्ष संत श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने अपने जारी वीडियो बयान में कहा कि अखाड़ा परिषद हरिद्वार कुंभ और नासिक के साथ उज्जैन में होने वाले महाकुंभ की तैयारियां कर रही है।इसके लिए अखाड़ों के साथ विचार विमर्श करने के साथ संबंधित राज्य सरकारों से वार्ता भी की जा रही है। हर राज्य में हो रही बैठक में सभी अखाड़ों के दो-दो प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। हरिद्वार कुंभ में सभी अखाड़े प्रतिभाग करेंगे। अखाड़ों की पेशवाई और शाही स्नान का आयोजन भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हरिद्वार कुंभ में 50 करोड़ से अधिक श्रद्धालु शामिल होंगे इससे सनातन धर्म संस्कृति का परचम पूरी दुनिया में फहराएगा।बुधवार की बैठक में एक धड़े ने की थी कार्यकारिणी की घोषणा बता दें, कि बुधवार को एक वीडियो वायरल हुआ इसमें कुछ आश्रम से जुड़े संतों ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की कार्यकारिणी पर ही सवाल उठाया था। बाकायदा एक वीडियो बयान जारी करते हुए इसमें कहा गया था कि अर्धकुंभ कुंभ नहीं हो सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री के निर्णय पर भी प्रश्न चिन्ह खड़े किए थे। यहीं नहीं बाकायदा एक कार्यकारिणी गठित कर अपने धड़े को अलग बताया था।

 

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