Deprecated: Function WP_Dependencies->add_data() was called with an argument that is deprecated since version 6.9.0! IE conditional comments are ignored by all supported browsers. in /home/u141101890/domains/uttaranchalratna.com/public_html/wp-includes/functions.php on line 6131

अवैध पोस्टिंग का खुलासा करने की मिली सजा? पत्रकार ने सुरक्षा को लेकर सरकार से लगाई गुहार।

उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के बाजपुर में एक डिजिटल पत्रकार के साथ पुलिसिया बदसलूकी और उत्पीड़न का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पत्रकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के बदले ‘प्रतिशोध’ की कार्रवाई का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस विभाग इन दावों को पूरी तरह सिरे से खारिज कर रहा है।

भ्रष्टाचार की खबर और फिर ‘बुलडोजर’ एक्शन

मामला डिजिटल पत्रकार विमल भारती उर्फ गोल्डी निर्भीक से जुड़ा है। पीड़ित पत्रकार का दावा है कि उन्होंने 11 नवंबर 2025 को पुलिस विभाग के भीतर ‘अवैध पोस्टिंग’ के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया था। आरोप है कि इस खबर के सार्वजनिक होने के मात्र 24 घंटे के भीतर ही प्रशासन की टीम जेसीबी मशीनों के साथ उनके आवास पर ‘अतिक्रमण’ हटाने पहुंच गई। पत्रकार का आरोप है कि उन्हें बिना किसी पूर्व नोटिस के निशाना बनाया गया।

मारपीट और ‘डिजिटल डेटा’ को नष्ट करने का गंभीर आरोप

गोल्डी निर्भीक ने पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि:

  • उन्हें हिरासत में लेकर बन्नाखेड़ा चौकी ले जाया गया, जहाँ उनके साथ अमानवीय व्यवहार और मारपीट की गई।

  • उनके प्रोफेशनल डिजिटल डेटा और आईडी को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया गया ताकि भ्रष्टाचार से जुड़े सबूत मिटाए जा सकें।

  • पत्रकार का दावा है कि उन्होंने पहले भी अपनी सुरक्षा को लेकर उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पुलिस का पक्ष: “आरोप निराधार, जांच को भटकाने की कोशिश”

दूसरी ओर, पुलिस प्रशासन ने आधिकारिक बयान जारी कर इन सभी आरोपों को ‘तथ्यहीन और निराधार’ बताया है। पुलिस का कहना है कि:

  1. जो भी कार्रवाई की गई, वह पूरी तरह विधिसम्मत और कानूनी प्रक्रिया के तहत थी।

  2. मारपीट या दुर्व्यवहार की कोई भी घटना नहीं हुई है।

  3. संबंधित व्यक्ति कानून से बचने के लिए सोशल मीडिया पर गलत नैरेटिव सेट कर जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।

इस विवाद के बाद अब स्थानीय पत्रकार संगठनों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है। मामला अब “प्रेस की आजादी बनाम प्रशासनिक अनुशासन” की जंग बनता जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *