भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों पर उत्तराखंड में मतदाता सूचियों को त्रुटिहीन बनाने के लिए प्री-एसआईआर (Pre-SIR) अभियान तेज हो गया है। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने प्रेसवार्ता में बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य साल 2003 की मतदाता सूची का वर्तमान सूची के साथ मिलान (Mapping) करना है। अब तक प्रदेश में 75% मैपिंग का कार्य पूरा हो चुका है, और शेष कार्य के लिए 1 से 15 फरवरी 2026 तक विशेष अभियान चलाया जाएगा।
मैपिंग में देहरादून और ऊधमसिंह नगर पिछड़े
आंकड़ों के मुताबिक, मैपिंग की प्रगति में प्रदेश के दो बड़े जिले सबसे पीछे चल रहे हैं:
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ऊधमसिंह नगर: मात्र 59.64% मैपिंग।
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देहरादून: सबसे नीचे 57.23% मैपिंग। प्रशासन ने इन जिलों में कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं ताकि शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जा सके।
इस बार महिला और युवाओं पर ‘स्पेशल फोकस’
प्री-SIR के दूसरे चरण में चुनाव आयोग का विशेष ध्यान महिला मतदाताओं और युवा वोटर्स पर रहेगा। 2003 की ऐतिहासिक सूची से वर्तमान डेटा को मैप करने से फर्जी वोटर्स की पहचान और वोटिंग लिस्ट की पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

मतदाताओं के लिए डिजिटल सुविधा
अब मतदाता घर बैठे 2003 की वोटर लिस्ट देख सकते हैं। डॉ. जोगदंडे ने बताया कि:
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वेबसाइट ceo.uk.gov.in पर लिस्ट लाइव है।
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नाम, पिता/पति का नाम, बूथ संख्या या एरिया के आधार पर अपना विवरण सर्च किया जा सकता है।
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जनता से अपील की गई है कि वे अपने क्षेत्र के बीएलओ (BLO) का सहयोग करें।
राजनीतिक दलों की भूमिका
प्रदेश के 12,070 बूथों पर बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) की नियुक्ति हो चुकी है। चुनाव आयोग ने राष्ट्रीय राजनैतिक दलों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द शत-प्रतिशत बीएलए नियुक्त करें ताकि पुनरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।