
उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने गुरुवार को देहरादून स्थित सीबीआई कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण तालाबंदी और प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है। मंच का कहना है कि मामले की जांच से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल अब भी अनुत्तरित हैं, जिनका जवाब जनता और पीड़ित परिवार को मिलना चाहिए। प्रदर्शन से पहले आयोजित बैठक में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, नागरिक समाज के सदस्यों और विपक्षी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता सुजाता पॉल ने कहा कि मामले को लंबा समय बीत जाने के बावजूद जांच प्रक्रिया को लेकर अब भी कई संदेह बने हुए हैं। उनका कहना था कि पहले जांच एजेंसी की ओर से समय-समय पर प्रगति की जानकारी देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे लोगों के मन में कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
संयुक्त संघर्ष मंच ने मांग की है कि जांच प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए और मामले से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर स्पष्ट स्थिति सामने रखी जाए। मंच ने सवाल उठाया कि चर्चाओं में आए कथित वीआईपी से पूछताछ हुई या नहीं, रिजॉर्ट पर बुलडोजर चलाने और कथित सबूत नष्ट होने के मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई तथा अंकिता भंडारी के माता-पिता और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की स्थिति क्या रही। मंच से जुड़ी कमला पंत ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी प्रकार का राजनीतिक लाभ लेना नहीं, बल्कि जांच एजेंसी से जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग करना है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से लोग देहरादून पहुंचकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखेंगे और उम्मीद जताई कि जांच से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक कर न्याय प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा। वहीं, मामले में जांच एजेंसियों की ओर से कानून के तहत आगे की कार्रवाई जारी है।