Deprecated: Function WP_Dependencies->add_data() was called with an argument that is deprecated since version 6.9.0! IE conditional comments are ignored by all supported browsers. in /home/u141101890/domains/uttaranchalratna.com/public_html/wp-includes/functions.php on line 6170

अयोध्या चढ़ावा विवाद में एसआईटी की जांच तेज, सीएम को सौंपी जा सकती है रिपोर्ट

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की गणना के दौरान कथित अनियमितताओं और चोरी के आरोपों की जांच के बीच बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। जांच के दायरे में आए लगभग 40 गणनाकर्मियों को उनके दायित्वों से हटा दिया गया है और उनकी जगह नए कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। इसके साथ ही दान राशि की गणना प्रक्रिया की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को भी पहले से अधिक सख्त कर दिया गया है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने कई महत्वपूर्ण तथ्यों को सामने लाने के बाद मंदिर प्रशासन और ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रमुख लोगों को फिलहाल अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश दिए हैं।

सूत्रों के अनुसार एसआईटी पिछले छह दिनों से अयोध्या में रहकर मामले की गहन जांच कर रही थी। अब टीम के मुख्य सदस्य लखनऊ लौट चुके हैं और प्रारंभिक जांच रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। बताया जा रहा है कि लगभग 150 से अधिक पन्नों की विस्तृत प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जा सकती है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई तय होगी। हालांकि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और कई अधिकारी अयोध्या में रहकर अतिरिक्त साक्ष्य जुटाने तथा विभिन्न पहलुओं की पड़ताल में लगे हुए हैं।

जांच के दौरान सामने आया कि राम मंदिर में चढ़ावे की गणना के लिए लगभग 40 लोगों की टीम कार्यरत थी। इस टीम में मंदिर ट्रस्ट और बैंक से जुड़े कर्मचारी शामिल थे। गणना प्रक्रिया के दौरान ट्रस्ट के पदाधिकारी भी मौजूद रहते थे। एसआईटी की जांच में गणनाकर्मियों की भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े होने के बाद पूरे तंत्र में बदलाव किया गया है। अब नए कर्मचारियों की तैनाती की गई है और दान राशि की गणना ट्रस्ट पदाधिकारियों तथा बैंक अधिकारियों की प्रत्यक्ष निगरानी में कराई जा रही है।

सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसी ने कुछ प्रमुख लोगों को फिलहाल अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश दिए हैं। इनमें मंदिर ट्रस्ट और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण नाम शामिल बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसी का मानना है कि मामले की निष्पक्ष पड़ताल के लिए संबंधित लोगों की उपलब्धता आवश्यक है, ताकि जरूरत पड़ने पर उनसे पूछताछ की जा सके और तथ्यों का सत्यापन किया जा सके।

एसआईटी की जांच में कई ऐसे बिंदु सामने आए हैं जिनसे निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। जांच अधिकारियों का मानना है कि यदि निगरानी और नियंत्रण तंत्र अधिक मजबूत होता तो कथित अनियमितताओं को समय रहते रोका जा सकता था। इसी कारण रिपोर्ट में निगरानी व्यवस्था की कमजोरियों और प्रशासनिक खामियों का विशेष उल्लेख किया गया है।

सूत्रों के अनुसार जांच से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों और दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए रिपोर्ट का डाटा कई डिजिटल माध्यमों में संरक्षित किया गया है। प्रारंभिक जांच में लगभग 150 लोगों की भूमिका को संदेह के दायरे में बताया जा रहा है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। एसआईटी ने कथित चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं में संलिप्त पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश भी की है।

माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में एसआईटी दोबारा अयोध्या पहुंचकर मामले की विस्तृत जांच कर सकती है। जांच को अंतिम रूप देने के लिए टीम को अतिरिक्त समय दिए जाने की भी चर्चा है। फिलहाल पूरे मामले पर प्रदेश सरकार की नजर बनी हुई है और रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *