Deprecated: Function WP_Dependencies->add_data() was called with an argument that is deprecated since version 6.9.0! IE conditional comments are ignored by all supported browsers. in /home/u141101890/domains/uttaranchalratna.com/public_html/wp-includes/functions.php on line 6170

उत्तराखंड में साइबर सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता, 90 से ज्यादा वेबसाइटों के पुराने मामले से उठे सवाल

देहरादून: उत्तराखंड की सरकारी वेबसाइटों और डिजिटल सिस्टम की साइबर सुरक्षा को लेकर एक नया पैटर्न सामने आने के बाद विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है। साइबर सुरक्षा से जुड़े जानकारों का मानना है कि हैकर्स सरकारी छुट्टियों और सप्ताहांत के दौरान डिजिटल सिस्टम को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं। इसकी वजह छुट्टियों के दौरान वेबसाइटों पर अपेक्षाकृत कम ट्रैफिक और सीमित मानवीय निगरानी को माना जा रहा है। हालांकि, हालिया घटना को लेकर सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (ITDA) का कहना है कि फिलहाल केवल मालवेयर मिलने की पुष्टि हुई है और इसे सीधे साइबर हमले की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। ऐसे में घटना और संभावित खतरे के बीच अंतर को समझना जरूरी है।

गांधी जयंती पर प्रभावित हुई थीं 90 से ज्यादा वेबसाइटें

उत्तराखंड में पहले सामने आ चुकी साइबर घटनाओं को देखें तो छुट्टी वाले दिनों में डिजिटल सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं। 2 अक्टूबर 2024 यानी गांधी जयंती के दिन प्रदेश में बड़ा साइबर हमला सामने आया था। उस घटना में 90 से अधिक सरकारी वेबसाइटें प्रभावित हुई थीं और कई वेबसाइटों की सेवाएं ठप हो गई थीं। इसके बाद 14 अप्रैल, आंबेडकर जयंती के अवसर पर सरकारी अवकाश के दिन भी साइबर हमले से जुड़ी घटना सामने आई थी। हालिया मामले में शनिवार को संदिग्ध मालवेयर मिलने की जानकारी सामने आई, जबकि शनिवार को कई सरकारी कार्यालयों और सचिवालय के कुछ विभागों में अवकाश रहता है। इन घटनाओं के आधार पर विशेषज्ञ छुट्टी और वीकेंड के दौरान साइबर सुरक्षा व्यवस्था की अतिरिक्त निगरानी की जरूरत पर जोर दे रहे हैं।

छुट्टियों में क्यों बढ़ सकता है खतरा?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार छुट्टियों के दौरान सरकारी वेबसाइटों पर सामान्य दिनों की तुलना में यूजर ट्रैफिक कम हो सकता है। इसके अलावा कई कार्यालयों में स्टाफ की मौजूदगी भी सीमित रहती है। ऐसे माहौल में किसी संदिग्ध गतिविधि की पहचान और उस पर तत्काल प्रतिक्रिया देने में अपेक्षाकृत अधिक समय लग सकता है। हालांकि, किसी घटना को जानबूझकर छुट्टी के दिन किया गया साइबर हमला मानने से पहले तकनीकी जांच जरूरी है। केवल तारीख या समय के आधार पर किसी हमले की मंशा तय नहीं की जा सकती।

ITDA ने हालिया घटना को साइबर हमला मानने से किया इनकार

उत्तराखंड सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (ITDA) के निदेशक आलोक पांडे के मुताबिक हालिया मामले में एक मालवेयर की पहचान हुई थी। उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर हर दिन बड़ी संख्या में मालवेयर सामने आते हैं, इसलिए केवल मालवेयर मिलने के आधार पर इसे साइबर हमला नहीं माना जा सकता। ITDA की ओर से फिलहाल किसी सरकारी वेबसाइट से डेटा चोरी या लॉगिन क्रेडेंशियल के लीक होने की पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में यह पता लगाने के लिए तकनीकी जांच महत्वपूर्ण है कि मालवेयर का उद्देश्य क्या था और क्या किसी सरकारी डिजिटल सिस्टम पर इसका कोई वास्तविक प्रभाव पड़ा।

मालवेयर के जरिए कैसे हो सकता है नुकसान?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार हमलावर कई बार मालवेयर का इस्तेमाल किसी डिजिटल सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच बनाने के लिए करते हैं। इसके जरिए यूजरनेम, ईमेल आईडी, पासवर्ड और अन्य संवेदनशील लॉगिन जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि उत्तराखंड के हालिया मामले में ऐसा हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि अभी जांच का विषय है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सरकारी एजेंसियों ने फिलहाल किसी डेटा चोरी या सुरक्षा उल्लंघन की पुष्टि नहीं की है।

सरकारी वेबसाइटों की 24×7 निगरानी पर जोर

लगातार सामने आ रही साइबर सुरक्षा घटनाओं के बीच विशेषज्ञ सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की सलाह दे रहे हैं। इसके लिए वेबसाइटों और सर्वरों की 24×7 साइबर मॉनिटरिंग, नियमित सुरक्षा ऑडिट, समय पर सॉफ्टवेयर और सिक्योरिटी पैच अपडेट तथा संदिग्ध गतिविधियों की तत्काल पहचान करने वाले सिस्टम को मजबूत करना जरूरी बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी वेबसाइटें आम नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण डिजिटल सेवाओं का माध्यम हैं। इसलिए छुट्टियों और सप्ताहांत के दौरान भी सुरक्षा निगरानी में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए। फिलहाल उत्तराखंड में हालिया मालवेयर मामले की तकनीकी जांच और उसके संभावित प्रभावों को लेकर स्थिति पर नजर रखी जा रही है। यदि जांच में किसी अनधिकृत गतिविधि या डेटा तक पहुंच की पुष्टि होती है, तो मामले की गंभीरता और बढ़ सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *