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देहरादून: उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय है और पहाड़ से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक बारिश का दौर जारी है। लगातार हो रही बारिश और घने बादलों के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। देहरादून के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है, जबकि बारिश के चलते नदी-नालों का जलस्तर भी बढ़ रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और मलबा आने से कई सड़कों पर यातायात प्रभावित हुआ है।
देहरादून-टिहरी में ऑरेंज अलर्ट
मौसम विभाग ने सोमवार, 17 अगस्त को देहरादून और टिहरी जिले के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में कहीं-कहीं आकाशीय बिजली के साथ बारिश के अति तीव्र से अत्यंत तीव्र दौर की संभावना जताई गई है। प्रदेश के अन्य जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में भी कुछ स्थानों पर भारी बारिश के साथ तेज गरज-चमक और आकाशीय बिजली की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
कुमाऊं में भी बारिश से जनजीवन प्रभावित
कुमाऊं मंडल के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश जारी है। इसका असर खासतौर पर दूरस्थ और पर्वतीय इलाकों में दिखाई दे रहा है। सीमांत जिले पिथौरागढ़ में शनिवार रात हुई तेज बारिश के बाद कई जगह सड़कें बाधित हो गईं। लगातार बारिश के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं। टनकपुर-तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग और कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग पर मलबा आने के कारण पांच घंटे से अधिक समय तक यातायात प्रभावित रहा। वहीं, अस्कोट-कर्णप्रयाग मोटर मार्ग पर बेरीनाग और थल के बीच मलबा आने से कुछ समय के लिए वाहनों की आवाजाही रुक गई।
थल-मुनस्यारी मार्ग पर आठ घंटे तक फंसे वाहन
भारी बारिश के बीच थल-मुनस्यारी मोटर मार्ग पर ला-झेकला के पास एक डंपर फंस गया। इसके चलते सड़क करीब आठ घंटे तक बाधित रही और दोनों तरफ दर्जनों वाहन फंसे रहे। बारिश और भूस्खलन के कारण पहाड़ी सड़कों पर आवाजाही लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। ऐसे में पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को मौसम और सड़क की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
18 से 20 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार, 18 से 20 अगस्त के बीच भी उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश और गरज-चमक का सिलसिला जारी रह सकता है। बारिश के चलते पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और मलबा आने का खतरा बना रहेगा, जबकि मैदानी एवं निचले इलाकों में जलभराव की समस्या बढ़ सकती है। लगातार बारिश को देखते हुए भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में अनावश्यक रुकने से बचना जरूरी है। पर्वतीय मार्गों पर यात्रा करने वालों को स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से जारी मौसम एवं सड़क संबंधी अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।