
देहरादून के चंद्रबनी क्षेत्र में पेयजल संकट दूर करने के लिए प्रस्तावित योजना अब भूमि विवाद में उलझती नजर आ रही है। करीब 20 हजार की आबादी को राहत देने के उद्देश्य से तैयार की गई यह योजना आधा बीघा जमीन नहीं मिलने के कारण अटक गई है। जानकारी के अनुसार विश्व बैंक पोषित मेहूंवाला क्लस्टर पेयजल योजना के तहत क्षेत्र में नलकूप और ओवरहेड टैंक निर्माण की तैयारी की जा रही थी। इसके लिए प्रशासन ने चंद्रबनी स्थित श्मशान घाट की बाउंड्री से सटी भूमि आवंटित की थी।
हालांकि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही कुछ स्थानीय लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना है कि यह क्षेत्र का प्रमुख श्मशान घाट है और यहां बच्चों के शव दफनाए जाते हैं, इसलिए पेयजल योजना को किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट किया जाना चाहिए। इसी बीच श्मशान घाट की जमीन पर अतिक्रमण के आरोप भी सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार पहले राजस्व अभिलेखों में श्मशान घाट के नाम अधिक भूमि दर्ज थी, लेकिन समय के साथ इसका क्षेत्रफल कम हो गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। सविन बंसल ने तहसील प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर जल्द रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। वर्तमान में भूमि की पैमाइश और सीमांकन का कार्य किया जा रहा है।
विनोद सेमवाल ने बताया कि परियोजना के लिए करीब चार करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार की गई है। उनके अनुसार क्षेत्र में सबसे बेहतर भूजल स्तर श्मशान घाट और आसपास के इलाके में मिला, जिसके आधार पर यहां नलकूप और टैंक निर्माण का प्रस्ताव रखा गया था। वहीं पूर्व पार्षद सुखबीर बुटोला ने कहा कि क्षेत्र में लंबे समय से पानी की समस्या बनी हुई है और गर्मियों में हालात और गंभीर हो जाते हैं। बढ़ती आबादी के कारण लोगों को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।