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पंजाब विधानसभा में आज फिर हंगामे के आसार, विधेयकों पर चर्चा को लेकर आमने-सामने सरकार-विपक्ष

पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र का आज अंतिम दिन है और सदन में सियासी हलचल बढ़ गई है। सरकार की ओर से आठ महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने की संभावना है। इनमें तीन नई डिजिटल ओपन यूनिवर्सिटी स्थापित करने से जुड़े विधेयक भी शामिल हैं। इन विधेयकों को लेकर विपक्ष ने सरकार पर जल्दबाजी का आरोप लगाया है। नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया और विधेयकों पर चर्चा के लिए सदन का समय बढ़ाने की मांग की। कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विधेयकों को पढ़ने, समझने और उन पर विस्तृत चर्चा करने के लिए एक दिन का समय पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि इन प्रस्तावों का सीधा संबंध आम लोगों से है, इसलिए इन पर जल्दबाजी में फैसला नहीं होना चाहिए। सरकार की ओर से क्लाउड यूनिवर्सिटी होशियारपुर विधेयक-2026, एमएस डिजिटल यूनिवर्सिटी पटियाला विधेयक-2026 और फिजिक्सवाला डिजिटल यूनिवर्सिटी पटियाला विधेयक-2026 पेश किए जाने की संभावना है। इन विधेयकों के जरिए राज्य में डिजिटल और आधुनिक शिक्षा के नए संस्थान स्थापित करने का रास्ता तैयार किया जाएगा। इसके अलावा पंजाब कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर (रेगुलेशन एंड मेंटेनेंस) संशोधन विधेयक-2026 भी सदन में लाया जा सकता है। इसके माध्यम से औद्योगिक क्षेत्रों के बेहतर प्रबंधन के लिए गठित विशेष प्रयोजन वाहन यानी एसपीवी की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने का प्रावधान है।

पंजाब वस्तु एवं सेवा कर यानी GST संशोधन विधेयक-2026 में बिक्री के बाद दी जाने वाली छूट को लेकर प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत पूर्व समझौते की शर्त के बिना क्रेडिट नोट जारी कर आपूर्ति की कीमत से ऐसी छूट को बाहर रखने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। पंजाब स्टेट आउटसोर्स्ड ट्रांजिशन टू कॉन्ट्रैक्चुअल एंगेजमेंट विधेयक-2026 भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके तहत जोखिम वाली श्रेणियों में तैनात कर्मचारियों को तीन वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद सीधे अनुबंध पर लाने की व्यवस्था किए जाने की तैयारी है। इसके साथ ही पंचायती राज संशोधन विधेयक-2026 और बिना सहायता प्राप्त निजी स्कूलों में फीस से जुड़े विधेयक को भी सदन में पेश किया जा सकता है। इन प्रस्तावों को लेकर भी विपक्ष सरकार से विस्तृत चर्चा की मांग कर रहा है।

सुखपाल सिंह खैरा ने विधानसभा अध्यक्ष से अपील की है कि सदन का समय कुछ और दिनों के लिए बढ़ाया जाए। उनका कहना है कि विधेयकों को पढ़ने और उनके प्रभावों पर चर्चा करने के लिए विधायकों को पर्याप्त समय मिलना जरूरी है। कांग्रेस का तर्क है कि यदि अंतिम दिन ही बड़ी संख्या में विधेयक पेश किए गए तो उन पर गंभीर बहस के लिए पर्याप्त समय नहीं बचेगा। ऐसे में विपक्ष सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए सदन का समय बढ़ाने पर जोर दे रहा है। वहीं, सरकार की ओर से विधेयकों को सदन में लाने की तैयारी के बीच विधानसभा की कार्यवाही हंगामेदार रहने के आसार हैं। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इन विधेयकों को किस तरह सदन में आगे बढ़ाती है और विपक्ष की अतिरिक्त समय की मांग पर विधानसभा अध्यक्ष क्या फैसला लेते हैं।

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