समाज को संबोधित करते हुए कहा कि विश्व हिंदू परिषद पिछले छह दशकों से सेवा, संस्कार, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि परिषद केवल एक संगठन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों और राष्ट्र चेतना के संरक्षण एवं संवर्धन का एक सशक्त माध्यम है, जिसने समाज को संगठित करने और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि वर्तमान समय में देश और दुनिया तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों, परंपराओं और मूल्यों से जुड़े रहना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी वर्गों से सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए देश निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मजबूत समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण तभी संभव है जब लोग अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करते हुए विकास और विरासत दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के पुनर्जागरण का साक्षी बन रहा है। अयोध्या में भगवान श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम का भव्य पुनर्विकास और उज्जैन में महाकाल लोक जैसी परियोजनाओं ने देश की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि इन कार्यों ने करोड़ों लोगों की आस्था को सम्मान देने के साथ-साथ भारत की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर नई मजबूती प्रदान की है।
धामी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार भी राज्य को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। इसके तहत केदारखंड और मानसखंड क्षेत्रों में स्थित प्राचीन मंदिरों का पुनर्विकास और सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। साथ ही हरिपुर कालसी स्थित यमुनातीर्थ के पुनरुद्धार, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर और गोल्ज्यू कॉरिडोर जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर भी संरक्षित हो सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान, आध्यात्मिक विरासत और मूल स्वरूप को सुरक्षित रखने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। इसी उद्देश्य से राज्य में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया गया है। समान नागरिक संहिता लागू कर सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान कानून सुनिश्चित किए गए हैं। इसके अलावा सख्त भू-कानून लागू कर प्रदेश की भूमि, संस्कृति और जनहितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि अतिक्रमण के खिलाफ व्यापक अभियान चलाकर सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है और कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। सरकार का उद्देश्य विकास के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक संतुलन बनाए रखना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को उत्तराखंड की मूल पहचान सुरक्षित रूप में मिल सके।
युवाओं को भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों से जोड़ने के उद्देश्य से दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज’ की स्थापना की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस केंद्र के माध्यम से भारतीय दर्शन, संस्कृति, इतिहास और सभ्यता से जुड़े विषयों पर अध्ययन और शोध को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत केंद्र है, जिसकी पहचान को सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के दौरान विश्व हिंदू परिषद के मार्गदर्शक मंडल से जुड़े संत-महात्माओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को धर्मरक्षक, सनातन सेवा के लिए समर्पित तथा देवभूमि के देवालयों का सेवक बताते हुए संत समाज की ओर से आशीर्वाद प्रदान किया। महामंडलेश्वर स्वामी यतीन्द्रानंद गिरि ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्वभर में सनातन संस्कृति का प्रभाव बढ़ रहा है और उत्तराखंड में मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में सनातन मूल्यों के संरक्षण के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने धर्मांतरण विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता, लव जिहाद और भूमि अतिक्रमण जैसी चुनौतियों के विरुद्ध सरकार की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि इन निर्णयों ने उत्तराखंड को सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित किया है। वहीं महामंडलेश्वर स्वामी रूपेन्द्र प्रकाश महाराज ने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण सदियों की प्रतीक्षा का परिणाम है और यह भारत की सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण का प्रतीक है।
संत समाज ने उत्तराखंड में तेजी से बदल रही जनसांख्यिकी को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को सुरक्षित रखना समय की आवश्यकता है। उन्होंने देवभूमि के पौराणिक स्वरूप, सांस्कृतिक मानबिंदुओं और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के लिए धामी सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को सराहनीय बताते हुए उम्मीद जताई कि भविष्य में भी राज्य सरकार इसी प्रकार दृढ़ता के साथ कार्य करती रहेगी।