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हरिद्वार में सतीकुंड पुनरोद्धार परियोजना विवादों में, डीपीआर और टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल

हरिद्वार: अर्धकुंभ 2027 की तैयारियों के बीच सतीकुंड पुनरोद्धार परियोजना को लेकर नया विवाद सामने आया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता, हरिद्वार के प्रथम जिला पंचायत अध्यक्ष और श्रीगंगा सभा के पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी ने परियोजना की लागत, डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) और ठेका प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने सरकार से पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने और परियोजना से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है।

परियोजना की लागत पर उठाए सवाल

मीडिया से बातचीत के दौरान अशोक त्रिपाठी ने दावा किया कि जिस कार्य की अनुमानित लागत लगभग 5 करोड़ रुपये होनी चाहिए थी, उसी परियोजना को करीब 61 करोड़ रुपये में स्वीकृति दी गई। उन्होंने कहा कि लागत में इतना बड़ा अंतर कई सवाल खड़े करता है और इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि परियोजना की लागत तकनीकी कारणों से बढ़ाई गई है, तो उसका स्पष्ट आधार और पूरा वित्तीय विवरण भी जनता के सामने रखा जाना चाहिए।

डीपीआर और ठेका प्रक्रिया पर भी जताई आपत्ति

भाजपा नेता के अनुसार परियोजना की डीपीआर उत्तराखंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एजेंसी (यूयूआईडीसी) द्वारा तैयार की गई, जबकि कार्यदायी संस्था के रूप में एनबीसीसी को जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद निर्माण कार्य का ठेका गुजरात की एक कंपनी को दिया गया।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उत्तराखंड की सरकारी एजेंसियां या स्थानीय निर्माण संस्थाएं इस परियोजना को पूरा करने में सक्षम नहीं थीं। उनका कहना है कि टेंडर प्रक्रिया और एजेंसी चयन को लेकर भी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

जीरो टॉलरेंस नीति पर भी उठाए सवाल

अशोक त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनाई गई “जीरो टॉलरेंस” नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्ध है, तो सतीकुंड परियोजना की डीपीआर, लागत निर्धारण, टेंडर प्रक्रिया और वित्तीय स्वीकृतियों का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

उन्होंने परियोजना की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की।

मुख्यमंत्री से मुलाकात न होने का दावा

प्रेस वार्ता में उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अपनी चिंताओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराने के लिए कई बार समय लेने का प्रयास किया, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। उन्होंने संगठनात्मक स्तर पर भी अपनी बात रखने के सीमित अवसर मिलने की बात कही।

मेला अधिकारी पर भी लगाए आरोप

अशोक त्रिपाठी ने बातचीत के दौरान मेला अधिकारी पर परोक्ष रूप से दबाव बनाने और धमकी देने का आरोप भी लगाया। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

सतीकुंड पुनरोद्धार परियोजना को लेकर लगाए गए इन आरोपों के बाद अब निगाहें सरकार की प्रतिक्रिया पर हैं। फिलहाल संबंधित विभागों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

यदि सरकार परियोजना से जुड़े दस्तावेज, लागत का आधार और टेंडर प्रक्रिया सार्वजनिक करती है, तो पूरे मामले की स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकती है। वहीं दूसरी ओर, आरोपों की पुष्टि या खंडन के लिए आधिकारिक जांच अथवा सरकारी स्पष्टीकरण का इंतजार रहेगा।

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