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सेवा और पारदर्शिता का संगम: 17 फरवरी तक प्रदेशभर में 5.12 लाख नागरिकों ने उठाया सरकारी कैंपों का लाभ।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान उत्तराखंड में सुशासन और जवाबदेही का नया चेहरा बनकर उभरा है। इस अभिनव पहल के जरिए सरकार अब दफ्तरों से निकलकर सीधे जनता की चौखट पर पहुँच रही है। 17 फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेशभर में अब तक कुल 648 कैंप आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 5,12,767 नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की है।

त्वरित निस्तारण और सेवा पर जोर

सरकार की इस प्रतिबद्धता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक प्राप्त शिकायतों में से 32,841 शिकायतों का मौके पर ही निराकरण कर दिया गया है। इसके अलावा, विभिन्न प्रमाण पत्रों के लिए प्राप्त 70,243 आवेदनों पर तेजी से कार्यवाही की जा रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें धरातल पर शत-प्रतिशत उतारना है।

जनपदों में व्यापक जनसमर्थन

प्रदेश के सभी 13 जनपदों—अल्मोड़ा, बागेश्वर, चम्पावत, पिथौरागढ़, नैनीताल, ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी—में इन कैंपों का जाल बिछाया गया है। विशेष रूप से मैदानी जिलों जैसे हरिद्वार, देहरादून और ऊधम सिंह नगर के साथ-साथ पौड़ी जैसे पहाड़ी जिलों में भी जनता ने भारी संख्या में पहुँचकर अपनी समस्याओं का समाधान कराया है।

योजनाओं से लाभान्वित हुए 2.85 लाख लोग

कैंपों के माध्यम से केवल शिकायतें ही नहीं सुनी जा रही हैं, बल्कि विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी तुरंत दिया जा रहा है। अब तक 2,85,738 व्यक्ति इन कैंपों के माध्यम से सीधे तौर पर लाभान्वित हो चुके हैं। सीएम धामी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक शिकायत का गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जाए ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकार की योजनाओं से अछूता न रहे।

सीएम धामी का विजन: सेवा, पारदर्शिता और जवाबदेही

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “यह अभियान प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को समाप्त कर रहा है। हम सेवा और पारदर्शिता आधारित प्रशासन की एक ऐसी संस्कृति विकसित कर रहे हैं, जहाँ सरकार खुद जनता के द्वार जाकर उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरे।”

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