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देहरादून: उत्तराखंड में ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों की सड़क कनेक्टिविटी मजबूत करने की दिशा में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) के चौथे चरण पर तेजी से काम किया जा रहा है। राज्य सरकार ने करीब 400 ग्रामीण सड़कों को PMGSY फेज-4 में शामिल कराने के लिए प्रस्ताव भेजे हैं, जिन पर अब केंद्र सरकार की मंजूरी का इंतजार है। इसके अलावा 19 PMGSY पुलों और 13 वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम से जुड़े पुलों को भी स्वीकृति मिलनी बाकी है। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में दूरदराज के गांवों को मुख्य सड़कों से जोड़ना हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा है। ऐसे में PMGSY फेज-4 के तहत उन सड़कों को प्राथमिकता देने की तैयारी की जा रही है, जो किसी कारणवश योजना के पहले तीन चरणों में शामिल नहीं हो सकीं या जिनका निर्माण नहीं हो पाया।
184 ग्रामीण सड़कों को मिल चुकी है मंजूरी
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के चौथे चरण के तहत उत्तराखंड की करीब 184 ग्रामीण सड़कों को भारत सरकार से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। इन परियोजनाओं के लिए निविदा प्रक्रिया भी पूरी की जा चुकी है और अब इनके निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया चल रही है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण इलाकों में अधिक से अधिक सड़कों को PMGSY फेज-4 के दायरे में लाया जाए, ताकि पर्वतीय और दूरस्थ गांवों तक बेहतर सड़क सुविधा पहुंच सके।
400 सड़कों के प्रस्ताव केंद्र के पास लंबित
प्रदेश में अभी भी बड़ी संख्या में ऐसी सड़कें हैं, जिन्हें PMGSY के पहले तीन चरणों में स्वीकृति या निर्माण का लाभ नहीं मिल सका। इन्हीं में से करीब 400 सड़कों को अब चौथे चरण में शामिल कराने का प्रयास किया जा रहा है। इन प्रस्तावों पर केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क का विस्तार होगा और दूरस्थ गांवों की मुख्य मार्गों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।
32 पुलों की मंजूरी का भी इंतजार
सिर्फ सड़कों ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड ने पुल निर्माण के लिए भी कई प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे हैं। इनमें 19 पुल प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत, जबकि 13 पुल वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के अंतर्गत प्रस्तावित हैं। इन पुलों के निर्माण से ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में नदी-नालों तथा दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण प्रभावित आवागमन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। खासतौर पर सीमावर्ती गांवों में सड़क और पुल कनेक्टिविटी को मजबूत करना विकास के साथ-साथ रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सीमावर्ती गांवों की कनेक्टिविटी पर विशेष फोकस
वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। बेहतर सड़क और पुल संपर्क से इन क्षेत्रों के लोगों को आवागमन की सुविधा मिलने के साथ-साथ दूरस्थ गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने में भी मदद मिलेगी। PMGSY के सीईओ अभिषेक रुहेला के अनुसार, राज्य सरकार फेज-4 में अधिक से अधिक ग्रामीण सड़कों को शामिल कराने का प्रयास कर रही है। करीब 400 सड़कों के प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे जा चुके हैं और अब उनकी मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।
केंद्र से इन प्रस्तावों को हरी झंडी मिलने पर उत्तराखंड के उन गांवों को बेहतर सड़क सुविधा मिल सकती है, जो अब तक योजना के पिछले चरणों में छूट गए थे। वहीं प्रस्तावित पुलों की मंजूरी से पर्वतीय, ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों की कनेक्टिविटी को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।