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EO Recruitment Controversy: बेरोज़गार युवाओं ने सरकार से पारदर्शी भर्ती की मांग की

देहरादून: उत्तराखंड के शहरी विकास विभाग में प्रभारी अधिशासी अधिकारी (EO) की नियुक्तियों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पहले इन नियुक्तियों की वैधानिक प्रक्रिया और सेवा नियमों को लेकर सवाल उठे थे, अब उत्तराखंड बेरोज़गार संघ ने भी इस मुद्दे को लेकर मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को संगठन के बैनर तले बड़ी संख्या में युवाओं ने शहरी विकास निदेशालय के बाहर प्रदर्शन कर सरकार से नियुक्ति आदेश वापस लेने, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती शुरू करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि नगर निकायों में लंबे समय से अधिशासी अधिकारियों के कई पद खाली हैं। उनका आरोप है कि नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के बजाय विभाग ने विभिन्न पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को प्रभारी ईओ बनाकर योग्य और बेरोज़गार युवाओं के अवसर सीमित कर दिए हैं।

राम कंडवाल के नेतृत्व में हुआ प्रदर्शन

उत्तराखंड बेरोज़गार संघ के अध्यक्ष राम कंडवाल के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी निदेशालय पहुंचे और नियुक्ति आदेशों का विरोध किया। संगठन का कहना है कि विभागीय आदेशों के जरिए ऐसे कर्मचारियों को प्रभारी अधिशासी अधिकारी बनाया गया है, जो सामान्य सेवा नियमों के तहत इस पद के लिए पात्र नहीं माने जाते। प्रदर्शन के दौरान संगठन ने शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा पर नियुक्तियों में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। संगठन का दावा है कि नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में प्रदर्शनकारियों की ओर से कोई आधिकारिक दस्तावेज़ या सार्वजनिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।

उच्चस्तरीय जांच और नियमित भर्ती की मांग

बेरोज़गार संघ ने सरकार से मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए ताकि नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सभी सवालों का निष्पक्ष परीक्षण हो सके। संगठन का कहना है कि यदि जांच में कोई अनियमितता नहीं मिलती तो स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, लेकिन यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। संगठन ने यह भी मांग की कि अधिशासी अधिकारियों के रिक्त पदों पर जल्द से जल्द पारदर्शी और नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को समान अवसर मिल सके।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि विवादित आदेश वापस नहीं लिया गया और भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी बनाया जाएगा। संगठन के अनुसार अगले चरण में मंत्री आवास घेराव और अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।

क्या है पूरा विवाद?

हाल ही में शहरी विकास निदेशालय ने प्रदेश के विभिन्न नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में कार्यरत क्लर्क, कर निरीक्षक, सफाई निरीक्षक और अन्य कर्मचारियों को प्रभारी अधिशासी अधिकारी (EO) की जिम्मेदारी सौंपने के आदेश जारी किए थे। विभाग के अनुसार प्रदेश में अधिशासी अधिकारियों के कई पद लंबे समय से रिक्त हैं। प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों, इसलिए अस्थायी व्यवस्था के तहत विभागीय कर्मचारियों को प्रभारी ईओ बनाया गया। इसी निर्णय के बाद नियुक्तियों की वैधानिकता और सेवा नियमों को लेकर बहस शुरू हो गई।

सेवा नियमों को लेकर उठ रहे सवाल

विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि स्थानीय निकाय (केंद्रीयकृत) सेवा नियमावली-2016 और पूर्व से लागू सेवा नियमों के अनुसार अधिशासी अधिकारी के पद पर नियुक्ति निर्धारित प्रक्रिया, पात्रता और वैधानिक व्यवस्था के तहत होनी चाहिए। ऐसे में विभिन्न संवर्गों के कर्मचारियों को सीधे प्रभारी ईओ बनाना नियमों की भावना के अनुरूप है या नहीं, इसे लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

हाईकोर्ट के निर्देश भी चर्चा में

यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि नैनीताल हाईकोर्ट ने पूर्व में नगर निकायों में अधिशासी अधिकारियों की कमी को लेकर राज्य सरकार से स्थायी समाधान तलाशने और रिक्त पदों पर उचित निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। बेरोज़गार संघ का आरोप है कि नियमित भर्ती के बजाय अस्थायी प्रभारी व्यवस्था अपनाकर मूल समस्या का समाधान नहीं किया गया।

सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल शहरी विकास विभाग या शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा की ओर से संगठन द्वारा लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर है। यदि जल्द कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया, तो यह मुद्दा आने वाले दिनों में उत्तराखंड की राजनीति और युवाओं के आंदोलनों का बड़ा विषय बन सकता है।

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