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देहरादून:- उत्तराखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दूसरे चरण में करीब 19.04 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए मतदाता सूची से नाम हटाने की आशंका जताई है, जबकि भाजपा का कहना है कि यह चुनाव आयोग की सामान्य सत्यापन प्रक्रिया है और इससे घबराने की जरूरत नहीं है।
पहले चरण में 8.26 लाख नाम हटाए गए
चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे SIR अभियान के पहले चरण में एएसडीडी (Absent, Shifted, Death, Duplicate) श्रेणी में आने वाले 8,26,977 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे। इसके बाद 14 जुलाई को जारी अनंतिम ड्राफ्ट रोल के अनुसार राज्य में कुल 71,33,785 मतदाता दर्ज किए गए।
दूसरे चरण में 19 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस
दूसरे चरण की जांच के दौरान 19,04,380 मतदाता ऐसे पाए गए, जिनके रिकॉर्ड में विभिन्न प्रकार की विसंगतियां (Anomalies) सामने आईं। चुनाव आयोग ने इन मतदाताओं को दस्तावेजों के सत्यापन के लिए नोटिस जारी किए हैं। इसके अलावा, जिन मतदाताओं की प्री-SIR प्रक्रिया में मैपिंग नहीं हो सकी थी, उन्हें भी नोटिस भेजे गए हैं।
24 लाख नोटिस में से 19 लाख पहुंचाए गए
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, लगभग 24 लाख नोटिसों में से करीब 19 लाख नोटिस बीएलओ के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंचाए जा चुके हैं। अब तक आयोग को फॉर्म-6 के लगभग 93 हजार, फॉर्म-7 के 1.39 लाख और फॉर्म-8 के 40 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। फॉर्म-7 से जुड़े मामलों की जांच ईआरओ और एईआरओ स्तर पर नियमानुसार की जा रही है।
फॉर्म-7 को लेकर कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि फॉर्म-7 का इस्तेमाल चुनिंदा मतदाताओं, विशेषकर कांग्रेस समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि कई विधानसभा क्षेत्रों से इस तरह की शिकायतें सामने आई हैं और कार्यकर्ता पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने क्या कहा?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने स्पष्ट किया कि दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के तहत संचालित की जा रही है। उन्होंने बताया कि एक मतदाता अधिकतम पांच मामलों में दावा या आपत्ति दर्ज करा सकता है। वहीं, बूथ लेवल एजेंट (BLA) प्रतिदिन अधिकतम 10 फॉर्म और पूरी पुनरीक्षण अवधि में 30 फॉर्म जमा कर सकते हैं। यदि इससे अधिक आवेदन आते हैं तो उनकी अलग से जांच और सत्यापन किया जाएगा। उन्होंने जिलों को निर्देश दिए हैं कि सामान्य त्रुटियों वाले मामलों का निस्तारण बीएलओ स्तर पर दस्तावेजों के सत्यापन के बाद किया जाए, जबकि मैपिंग से जुड़े मामलों की सुनवाई ईआरओ/एईआरओ स्तर पर की जाए।
भाजपा ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी ने कहा कि नोटिस जारी होने का मतलब किसी मतदाता का नाम हटना नहीं है। यह केवल दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया है। जिनके दस्तावेज सही होंगे, उनके नाम सुरक्षित रहेंगे। वहीं, भाजपा प्रवक्ता कुंदन परिहार ने कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार चल रही है और इसमें किसी राजनीतिक दल की कोई भूमिका नहीं है।
कांग्रेस ने जताई लोकतांत्रिक अधिकारों की चिंता
कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने कहा कि पहले ही लाखों मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा चुके हैं और अब 18 से 19 लाख लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। ऐसे में मतदाताओं की चिंता स्वाभाविक है और इसे भ्रम की राजनीति कहना उचित नहीं है। इधर, कांग्रेस विधायक भुवन चंद्र कापड़ी ने खटीमा विधानसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में फॉर्म-7 दाखिल किए जाने की शिकायत करते हुए जांच की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जांच में फर्जी आपत्तियां सही पाई गईं तो कांग्रेस कानूनी कार्रवाई के साथ आंदोलन भी करेगी।
नैनीताल सीट पर भी पहुंचे SIR नोटिस
राज्य में चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत और नैनीताल से भाजपा विधायक सरिता आर्या को भी सत्यापन संबंधी नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।