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आंगनबाड़ी केंद्रों में सप्लाई हो रहे उत्पादों पर उठे सवाल, लाभार्थी लेने से कर रहे परहेज

उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष एवं पूर्व जीएमवीएन उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से वितरित की जा रही खाद्य सामग्री की गुणवत्ता बेहद खराब है, जिससे गर्भवती महिलाओं, किशोरियों और बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

देहरादून में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान रघुनाथ सिंह नेगी ने दावा किया कि विभाग द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों को ऐसी खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है, जिसकी गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में सामग्री एक्सपायरी डेट के बेहद करीब पहुंच चुकी होती है, जिससे लाभार्थियों के स्वास्थ्य पर खतरा उत्पन्न हो सकता है। नेगी ने कहा कि यह मामला केवल गुणवत्ता का नहीं बल्कि महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य से सीधे जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि केंद्रीय भंडार, मसूरी के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों में दलिया, सत्तू, कुक्ड फूड, बाल भोग, हलवा और अन्य पोषाहार सामग्री की आपूर्ति की जाती है। उनके अनुसार इन उत्पादों की गुणवत्ता इतनी खराब है कि कई लाभार्थी इन्हें लेने या उपयोग करने से भी बच रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कई आंगनबाड़ी केंद्रों में खाद्य सामग्री लंबे समय तक पड़ी रहती है और उपयोग न होने के कारण खराब होने लगती है।

रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि यदि सरकार या संबंधित विभाग स्वतंत्र जांच कराए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि गुणवत्ता नियंत्रण की व्यवस्था प्रभावी नहीं है और विभाग लाभार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण पोषण सामग्री पहुंचाने में असफल साबित हो रहा है।

जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को उपलब्ध कराए जा रहे साड़ी और सूट की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई कार्यकर्ताओं ने इन वस्त्रों की गुणवत्ता को लेकर असंतोष जताया है और उनका उपयोग करने से परहेज किया है। नेगी के अनुसार सरकारी योजनाओं के तहत वितरित की जाने वाली सभी वस्तुओं की गुणवत्ता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

उन्होंने सरकार से मांग की कि टेक होम राशन (THR) योजना के तहत खाद्य सामग्री वितरित करने के बजाय लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से राशि भेजी जाए। उनका तर्क है कि इससे लाभार्थी अपनी आवश्यकता और पसंद के अनुसार बेहतर गुणवत्ता वाली खाद्य सामग्री खरीद सकेंगे तथा पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

नेगी ने कहा कि गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, किशोरियों और बच्चों के पोषण से जुड़ी योजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस मुद्दे पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई और लाभार्थियों के हितों की अनदेखी जारी रही, तो जन संघर्ष मोर्चा राज्यभर में आंदोलन शुरू करने पर मजबूर होगा।

हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि विभाग इन आरोपों की जांच कराता है या नहीं और यदि जांच होती है तो उसके निष्कर्ष क्या सामने आते हैं।

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