Deprecated: Function WP_Dependencies->add_data() was called with an argument that is deprecated since version 6.9.0! IE conditional comments are ignored by all supported browsers. in /home/u141101890/domains/uttaranchalratna.com/public_html/wp-includes/functions.php on line 6170

उत्तराखंड क्रांति दल का शक्ति प्रदर्शन, चुनाव से पहले पांच प्रमुख मुद्दों का किया ऐलान

देहरादून: उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने अपनी चुनावी तैयारियों को तेज कर दिया है। पार्टी ने ‘संकल्प, नए उत्तराखंड का’ के नाम से अपना नीतिगत एजेंडा जारी करते हुए प्रदेश की सभी 70 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। रविवार, 2 अगस्त को आयोजित कार्यक्रम में यूकेडी के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह, पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष और पूर्व विधायक काशी सिंह ऐरी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता एक मंच पर नजर आए। इस दौरान नेताओं ने संगठन की एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति और प्राथमिकताओं को सामने रखा।

‘उत्तराखंड की मौजूदा स्थिति स्वीकार नहीं’

यूकेडी के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह ने कहा कि राज्य गठन के बाद उत्तराखंड जिस स्थिति में पहुंचा है, वह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि पार्टी अब प्रदेश की मौजूदा परिस्थितियों को स्वीकार नहीं करेगी और राज्य के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर संघर्ष को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल ने अलग राज्य के लिए आंदोलन किया था और अब उसका लक्ष्य सुशासन एवं स्वशासन के जरिए उत्तराखंड को नई दिशा देना है। पार्टी का कहना है कि राज्य का शासन यहां के लोगों की आकांक्षाओं और स्थानीय हितों के अनुरूप होना चाहिए। यूकेडी ने अपने एजेंडे में उत्तराखंड के संतुलित विकास, सामाजिक-आर्थिक एवं राजनीतिक सशक्तीकरण के साथ प्रदेश की विशिष्ट पहचान, प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय हितों की सुरक्षा को प्रमुखता दी है।

अनुच्छेद 371 के तहत संवैधानिक सुरक्षा की मांग

यूकेडी ने नए उत्तराखंड के लिए पांच प्रमुख प्राथमिकताएं घोषित की हैं। इनमें सबसे प्रमुख मांग उत्तराखंड को संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत विशेष संवैधानिक प्रावधान दिए जाने की है। पार्टी का कहना है कि इससे उत्तराखंड के लोगों, पहाड़ी क्षेत्रों, प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय राजनीतिक हितों को स्थायी संवैधानिक संरक्षण मिल सकेगा।

मूल निवासियों के अधिकारों पर जोर

यूकेडी ने उत्तराखंड में मूल निवास को कानूनी मान्यता देने की मांग भी उठाई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मूल निवास व्यवस्था के जरिए राज्य के मूल निवासियों को विशेष अधिकार, संरक्षण और अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए। यूकेडी के अनुसार इससे उन लोगों की राज्य के विकास और आर्थिक समृद्धि में न्यायसंगत भागीदारी सुनिश्चित की जा सकेगी, जो पीढ़ियों से उत्तराखंड में रहते आए हैं।

नए भू-कानून का प्रस्ताव

पार्टी ने मौजूदा भूमि कानूनों में व्यापक बदलाव की वकालत करते हुए उत्तराखंड के लिए राज्य-विशिष्ट और प्रभावी भू-कानून लागू करने की बात कही है। यूकेडी का प्रस्ताव है कि नया भू-कानून भूमि अधिकारों की सुरक्षा के साथ चकबंदी को मजबूत करे, सतत विकास को बढ़ावा दे और भूमि प्रशासन को आधुनिक बनाए।

पहाड़ों में रोजगार और पलायन रोकने का दावा

यूकेडी ने पर्वतीय जिलों में रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ाने को भी अपनी प्राथमिकता बताया है। पार्टी का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सतत विकास के मजबूत केंद्रों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। दल का लक्ष्य पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन को रोकना और ऐसी परिस्थितियां तैयार करना है, जिससे उत्तराखंड के लोगों को अपने घर और क्षेत्र के आसपास ही रोजगार एवं बेहतर जीवन के अवसर मिल सकें।

आरक्षण के लाभों के न्यायसंगत वितरण की बात

पार्टी ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को मिलने वाले मौजूदा आरक्षण में कोई बदलाव किए बिना उसके लाभों के न्यायसंगत वितरण की बात कही है। यूकेडी के अनुसार आरक्षण का लाभ समाज के सबसे गरीब और वंचित परिवारों तक प्रभावी रूप से पहुंचना चाहिए। पार्टी ने कहा कि वह निर्धारित आरक्षण प्रतिशत में बदलाव किए बिना लाभों के उचित वितरण की दिशा में काम करेगी।

मूल निवासियों की समस्याओं को लेकर यूकेडी ने उठाए सवाल

यूकेडी नेताओं का कहना है कि उत्तराखंड के मूल निवासियों ने दशकों से राज्य के जंगलों, प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने गांवों और स्थानीय संस्कृति को बनाए रखने के साथ हिमालयी पारिस्थितिकी की सुरक्षा में भी योगदान दिया है। पार्टी का दावा है कि इसके बावजूद राज्य के विकास से पैदा हुए अवसरों में मूल निवासियों को अपेक्षित हिस्सेदारी नहीं मिल पाई। खासकर दूरदराज के पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के सामने आज भी रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर संपर्क जैसी कई चुनौतियां हैं। यूकेडी ने कृषि के कमजोर होने, भूमि के बढ़ते विखंडन, मानव-वन्यजीव संघर्ष और लगातार बढ़ते पलायन को भी गंभीर समस्या बताया। पार्टी नेताओं के मुताबिक कई ऐसे गांव, जो कभी आत्मनिर्भर और जीवंत पर्वतीय जीवन के उदाहरण थे, अब धीरे-धीरे खाली होते जा रहे हैं।

‘मूल निवास किसी वर्ग को विशेषाधिकार देना नहीं’

यूकेडी का कहना है कि मूल निवास व्यवस्था का उद्देश्य किसी सीमित वर्ग को विशेष लाभ देना नहीं, बल्कि उत्तराखंड में सामाजिक न्याय और स्थानीय लोगों की उचित भागीदारी सुनिश्चित करना है। पार्टी ने कहा कि जिन लोगों और समुदायों ने पीढ़ियों तक उत्तराखंड की संस्कृति, पर्यावरण और पहचान को संरक्षित रखा है, उन्हें राज्य के विकास और भविष्य में भी उचित अवसर मिलना चाहिए। आगामी विधानसभा चुनाव में सभी 70 सीटों पर अकेले मैदान में उतरने के ऐलान के साथ यूकेडी ने साफ कर दिया है कि वह 2027 के चुनाव में क्षेत्रीय मुद्दों और अपने नीतिगत एजेंडे के साथ जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *