
उत्तराखंड में नशे का बढ़ता कारोबार और युवाओं में मादक पदार्थों की लत अब गंभीर सामाजिक चिंता बनती जा रही है। पहाड़ से लेकर मैदान तक नशे का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य में हर दिन औसतन तीन लोगों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है। पिछले एक वर्ष के भीतर उत्तराखंड में एनडीपीएस एक्ट के तहत कुल 1162 मुकदमे दर्ज हुए हैं, जिनमें 267 मामले नशे की तस्करी से जुड़े थे, जबकि 895 लोग नशे का सेवन करते हुए पकड़े गए।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट ने उत्तराखंड समेत देश के कई पहाड़ी राज्यों में बढ़ते नशे के कारोबार की चिंताजनक तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्ट के मुताबिक हिमाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मिजोरम और अन्य पहाड़ी राज्यों में भी मादक पदार्थों की तस्करी और सेवन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। उत्तराखंड में युवाओं के बीच नशे की लत अब अपराधों को भी बढ़ावा दे रही है।
हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों में नशे के आदी युवाओं द्वारा गंभीर अपराधों को अंजाम दिए जाने के मामले भी सामने आ चुके हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार नशे की हालत में युवाओं द्वारा हिंसक घटनाएं और हत्या जैसी वारदातें भी की गई हैं। इससे समाज में डर और चिंता का माहौल बना हुआ है।
हाल ही में बनभूलपुरा क्षेत्र में पुलिस ने 24 वर्षीय युवक को 20 नशे के इंजेक्शन के साथ गिरफ्तार किया। पूछताछ में युवक ने बताया कि वह लंबे समय से नशे का आदी है और कई बार जेल भी जा चुका है। युवक ने यह भी स्वीकार किया कि लगातार नशे के इंजेक्शन लेने के कारण वह HIV संक्रमित हो चुका है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए जेल भेज दिया।
इसी तरह काठगोदाम क्षेत्र से भी एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जहां 72 वर्षीय बुजुर्ग पिता खुद पुलिस के पास पहुंचे और अपने बेटे को जेल भेजने की मांग की। बुजुर्ग ने आरोप लगाया कि उनका बेटा नशे की लत में इतना डूब चुका है कि परिवार के लोगों के साथ मारपीट करता है और विरोध करने पर हिंसक हो जाता है। पिता ने बताया कि बेटे ने उनका गला पकड़कर जान से मारने की कोशिश तक की।
NCRB रिपोर्ट के अनुसार असम में सबसे ज्यादा 3335 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश में 1715 केस सामने आए। उत्तराखंड में दर्ज मामलों की संख्या भी तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी राज्यों में बेरोजगारी, सीमावर्ती क्षेत्रों की संवेदनशीलता और युवाओं में बढ़ती मानसिक परेशानियां नशे की समस्या को बढ़ा रही हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नशे के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। एसपी सिटी डॉ. जगदीश चंद्र ने बताया कि पुलिस तस्करों और नशा करने वालों दोनों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। इसके साथ ही स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं ताकि युवाओं को नशे से दूर रखा जा सके।