देहरादून:- उत्तराखंड में मानसून की लगातार सक्रियता के बीच मौसम और आपदा का खतरा बढ़ता जा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के आठ जिलों में कम से मध्यम स्तर के फ्लैश फ्लड यानी अचानक बाढ़ के खतरे का पूर्वानुमान जताया है। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) ने संबंधित जिलों के प्रशासन को पूरी तरह अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए हैं। जिन आठ जिलों को फ्लैश फ्लड के लिहाज से संवेदनशील बताया गया है, उनमें देहरादून, उत्तरकाशी, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ शामिल हैं। चेतावनी के मुताबिक इन जिलों के कुछ जलग्रहण क्षेत्रों और निचले इलाकों में भारी बारिश होने पर अचानक जलभराव या फ्लैश फ्लड जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। लगातार बारिश के कारण प्रदेश की कई नदियों का जलस्तर भी बढ़ा हुआ है, जबकि राज्य में बड़ी संख्या में सड़कें बंद हैं। ऐसे हालात में प्रशासन ने आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी विभागों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
8 जिलों में हाई अलर्ट, निचले इलाकों पर विशेष नजर
IMD की चेतावनी के बाद SEOC ने आठ जिलों के जिलाधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा है। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि संवेदनशील जलग्रहण क्षेत्रों, नदी-नालों के आसपास और निचले इलाकों में लगातार निगरानी रखी जाए। अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि किसी भी स्थान पर अचानक पानी बढ़ने, जलभराव, भूस्खलन या अन्य आपदा की सूचना मिलते ही बिना देरी किए राहत और बचाव अभियान शुरू किया जाए। आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों और विभागीय नोडल अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस, राजस्व, ग्राम विकास और पंचायत स्तर के अधिकारियों को भी अपने-अपने क्षेत्रों में उपलब्ध रहने तथा मोबाइल फोन लगातार चालू रखने को कहा गया है।
सड़कें बंद होने से बढ़ी परेशानी, 104 मार्ग प्रभावित
लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण उत्तराखंड में सड़क कनेक्टिविटी भी प्रभावित हुई है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की गुरुवार शाम 6:30 बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में कुल 104 सड़कें बंद थीं। इनमें एक राष्ट्रीय राजमार्ग, दो BRO सड़कें, एक MDR, 17 लोक निर्माण विभाग की सड़कें और 84 PMGSY एवं ग्रामीण सड़कें शामिल हैं।
जिलेवार स्थिति की बात करें तो:
- चमोली में 23 सड़कें बंद हैं।
- पिथौरागढ़ में 19 सड़कें प्रभावित हैं।
- रुद्रप्रयाग में 17 सड़कें बंद हैं।
- टिहरी गढ़वाल में 12 सड़कें प्रभावित हैं।
- पौड़ी गढ़वाल में 7 सड़कें बंद हैं।
- बागेश्वर में 7 सड़कें प्रभावित हैं।
- देहरादून में 6 सड़कें बंद हैं।
प्रशासन ने PWD, PMGSY, BRO और अन्य संबंधित एजेंसियों को बंद सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर खोलने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील मार्गों पर मशीनरी की उपलब्धता सुनिश्चित करने और जरूरत पड़ने पर तत्काल मलबा हटाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
केदारनाथ और यमुनोत्री मार्ग पर भी असर
बारिश और भूस्खलन का असर चारधाम यात्रा मार्गों पर भी देखने को मिला है। रुद्रप्रयाग जिले में गौरीकुंड के पास केदारनाथ पैदल मार्ग पर मलबा और पत्थर गिरने से आवाजाही प्रभावित हुई। एहतियात के तौर पर यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोका गया। वहीं उत्तरकाशी जिले में जानकीचट्टी के पास यमुनोत्री पैदल मार्ग पर नदी का जलस्तर बढ़ने और बारिश के कारण रास्ते में फिसलन बढ़ने से यात्रियों की आवाजाही को कुछ समय के लिए रोक दिया गया। हालांकि, बड़कोट-नौगांव राष्ट्रीय राजमार्ग से मलबा हटाकर यातायात को दोबारा सुचारु कर दिया गया। प्रशासन की ओर से चारधाम यात्रियों को सलाह दी गई है कि मौसम विभाग की चेतावनी को ध्यान में रखते हुए यात्रा शुरू करने से पहले सड़क और मौसम की ताजा स्थिति की जानकारी जरूर लें।
नदियों के जलस्तर पर प्रशासन की नजर
लगातार बारिश के बीच राज्य की प्रमुख नदियों के जलस्तर की भी लगातार निगरानी की जा रही है। रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी नदियां चेतावनी स्तर के करीब बह रही हैं। इसके अलावा हरिद्वार में गंगा, उत्तरकाशी में भागीरथी, बागेश्वर में सरयू और गोमती तथा पिथौरागढ़ में काली, गोरी और सरयू नदियों के जलस्तर पर प्रशासन नजर बनाए हुए है। फिलहाल प्रमुख नदियां खतरे के निशान से नीचे बताई गई हैं, लेकिन बारिश के लगातार जारी रहने के कारण प्रशासन ने किसी भी स्थिति को हल्के में न लेने के निर्देश दिए हैं।
फंसने वालों के लिए भोजन-पानी और चिकित्सा की व्यवस्था
राज्य सरकार ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि यदि भारी बारिश, सड़क बंद होने या अचानक जलभराव के कारण कहीं लोग फंसते हैं तो उनके लिए तत्काल भोजन, पेयजल और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था की जाए। प्रशासन को राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूलों में भी विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने को कहा गया है। संवेदनशील मार्गों पर पहले से मशीनें तैनात रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही सीमित करने के निर्देश दिए गए हैं।
भूस्खलन वाले इलाकों में मशीनें पहले से रखने के निर्देश
बारिश के दौरान पहाड़ी इलाकों में अचानक भूस्खलन की घटनाएं सामने आने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील सड़कों पर मशीनरी की तैनाती को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं। PWD, PMGSY, BRO और अन्य एजेंसियों को कहा गया है कि भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में आवश्यक मशीनें और संसाधन पहले से उपलब्ध रहें, ताकि सड़क बंद होने की स्थिति में उसे जल्द से जल्द खोला जा सके। जिला सूचना अधिकारियों को मौसम की चेतावनी का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों से नदी-नालों के किनारे, जलभराव वाले क्षेत्रों और भूस्खलन संभावित स्थानों से दूरी बनाए रखने की अपील की गई है।
चारधाम यात्रा जारी, 45.63 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे
बारिश और मौसम की चुनौती के बावजूद चारधाम यात्रा जारी है। गुरुवार शाम तक बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में इस यात्रा सीजन में 45.63 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। केवल गुरुवार को ही चारों धामों में कुल 6,781 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। हालांकि, मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन ने यात्रियों से विशेष सावधानी बरतने को कहा है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले संबंधित मार्ग की स्थिति, मौसम का पूर्वानुमान और प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी जरूर जांच लें।
अगले कई दिनों तक जारी रह सकता है बारिश का दौर
मौसम विभाग के सात दिवसीय पूर्वानुमान के अनुसार 31 जुलाई से 5 अगस्त तक उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना बनी हुई है। लगातार सक्रिय मानसून को देखते हुए संवेदनशील पर्वतीय जिलों में अगले कुछ दिनों तक विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। बारिश के कारण मिट्टी पहले से संतृप्त होने की स्थिति में अचानक तेज बारिश होने पर भूस्खलन, जलभराव और फ्लैश फ्लड का खतरा बढ़ सकता है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि मौसम और आपदा की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए। किसी भी घटना की सूचना तत्काल राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष तक पहुंचाई जाए, ताकि राहत और बचाव कार्य शुरू करने में किसी तरह की देरी न हो। ऐसे में उत्तराखंड में अगले कुछ दिन मौसम के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं। प्रशासन जहां हाई अलर्ट पर है, वहीं आम लोगों और यात्रियों से भी नदी-नालों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और संवेदनशील पहाड़ी मार्गों पर अनावश्यक जोखिम न लेने की अपील की गई है।