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उत्तराखंड में सेनेटरी पैड विवाद, मंत्री रेखा आर्या पर गंभीर आरोप

उत्तराखंड में आंगनवाड़ी केंद्रों में वितरित किए जा रहे सेनेटरी पैड को लेकर नया विवाद सामने आया है। जन संघर्ष मोर्चा ने महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रदेशभर के आंगनवाड़ी केंद्रों में बेहद निम्न गुणवत्ता के सेनेटरी पैड वितरित किए जा रहे हैं। संगठन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने पत्रकार वार्ता में आरोप लगाया कि आंगनवाड़ी केंद्रों में महिलाओं और किशोरियों को ऐसे सेनेटरी पैड दिए जा रहे हैं जिनकी गुणवत्ता तय मानकों के अनुरूप नहीं है। उनका कहना है कि इस खरीद प्रक्रिया में महिलाओं के स्वास्थ्य की अनदेखी की गई है।

नेगी ने दावा किया कि वितरित किए जा रहे सेनेटरी पैड पर गुणवत्ता प्रमाणन से जुड़ी आवश्यक जानकारी भी स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और इससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका पैदा होती है। जन संघर्ष मोर्चा ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश के कई आंगनवाड़ी केंद्रों में सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीनें भी लगाई गई हैं, लेकिन उनका उपयोग बेहद सीमित है। संगठन का कहना है कि कई स्थानों पर ये मशीनें बेकार पड़ी हैं और इनका कोई खास लाभ नहीं मिल रहा। मोर्चा का दावा है कि कम गुणवत्ता होने के कारण कई महिलाएं और किशोरियां इन सेनेटरी पैड का इस्तेमाल नहीं करना चाहतीं। ऐसे में कई आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को स्टॉक का हिसाब पूरा करने के लिए आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा है। रघुनाथ सिंह नेगी ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में महिलाओं के स्वास्थ्य से समझौता किया गया है। नका कहना है कि यदि निम्न गुणवत्ता वाले उत्पादों के कारण किसी महिला या किशोरी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। जन संघर्ष मोर्चा ने राज्य सरकार से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, खरीद प्रक्रिया को सार्वजनिक करने और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों एवं जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। संगठन ने मंत्री रेखा आर्या को पद से हटाने की मांग भी दोहराई है। वहीं, इस मामले में मंत्री रेखा आर्या या महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने का इंतजार है। ऐसे में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

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