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दून पुलिस और एसओजी की संयुक्त कार्रवाई, हथियार तस्करी का खुलासा

देहरादून में अपराध और अवैध हथियारों के खिलाफ चलाए जा रहे “ऑपरेशन प्रहार” के तहत दून पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। कोतवाली पटेलनगर पुलिस और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की संयुक्त टीम ने 15 हजार रुपये के इनामी आरोपी समेत तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से एक पिस्टल, दो देशी तमंचे, मैगजीन और कई जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) देहरादून के निर्देश पर जिलेभर में अपराधियों और अवैध हथियारों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी दौरान मंगलवार रात पुलिस को सूचना मिली कि चंद्रबनी क्षेत्र में चोटिया बाबा मंदिर के पास निर्माणाधीन हाईवे के निकट तीन संदिग्ध युवक मौजूद हैं और किसी सौदेबाजी की तैयारी कर रहे हैं।

सूचना को गंभीरता से लेते हुए कोतवाली पटेलनगर पुलिस और एसओजी की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस ने निर्माणाधीन हाईवे की पुलिया के नीचे बैठे तीन युवकों की घेराबंदी कर उन्हें हिरासत में ले लिया। पूछताछ में उनकी पहचान फरहान पुत्र शौकीन निवासी लंढौरा, हरिद्वार, फरमान बेग पुत्र शफीक बेग निवासी आजाद कॉलोनी, देहरादून तथा जैद पुत्र इकबाल निवासी लंढौरा, हरिद्वार के रूप में हुई।

तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से एक 32 बोर की पिस्टल, दो खाली मैगजीन, दो जिंदा कारतूस, दो देशी तमंचे 315 बोर और चार जिंदा कारतूस बरामद किए। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि ये हथियार लंढौरा क्षेत्र से लाए गए थे और इन्हें देहरादून में बेचने की तैयारी की जा रही थी।

पुलिस जांच में एक महत्वपूर्ण खुलासा भी हुआ है। जांच के दौरान पता चला कि 14 जून को भुड्डी गांव में हुए चर्चित सोहेल हत्याकांड में इस्तेमाल की गई पिस्टल आरोपी फरहान ने ही उपलब्ध कराई थी। इस मामले में फरहान पहले से ही वांछित चल रहा था और लगातार फरार रहने के कारण एसएसपी देहरादून द्वारा उसकी गिरफ्तारी पर 15 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।

पुलिस का कहना है कि फरहान की गिरफ्तारी से सोहेल हत्याकांड की जांच को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही अवैध हथियारों की सप्लाई और तस्करी से जुड़े नेटवर्क का भी खुलासा हो सकता है।

तीनों आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हथियारों की आपूर्ति कहां से की जा रही थी और इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि अपराध और अवैध हथियारों के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

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