
केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू बुधवार को पंजाब अनुसूचित जाति (एससी) आयोग के समक्ष पेश हुए। उनके खिलाफ दर्ज शिकायत और जातिसूचक टिप्पणी से जुड़े विवाद के संबंध में आयोग ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा था। आयोग के समक्ष उपस्थित होकर बिट्टू ने पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा और घटनाक्रम की जानकारी दी।
यह मामला 26 मई को पंजाब के संगरूर जिले के धुरी क्षेत्र में हुए एक विवाद से जुड़ा है। नगर निकाय चुनाव के दौरान कथित तौर पर चुनाव आचार संहिता के तहत लागू ‘साइलेंट पीरियड’ में प्रचार करने के आरोप में भाजपा नेता ओंकार सिंह को पुलिस ने हिरासत में लिया था। ओंकार सिंह की गिरफ्तारी की सूचना मिलने पर केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू मौके पर पहुंचे और उनकी रिहाई की मांग की।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इस दौरान मंत्री और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई थी। बहस के दौरान कथित तौर पर कुछ ऐसी टिप्पणियां की गईं, जिन्हें लेकर बाद में विवाद खड़ा हो गया। आरोप लगाया गया कि पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपत्तिजनक और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। इसी शिकायत के आधार पर मामला पंजाब अनुसूचित जाति आयोग तक पहुंचा।
बुधवार को आयोग के समक्ष पेश होकर रवनीत सिंह बिट्टू ने अपना पक्ष रखा। सूत्रों के अनुसार उन्होंने पूरे घटनाक्रम को विस्तार से बताया और कहा कि उनकी मंशा किसी समुदाय या वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की नहीं थी। आयोग ने मामले से संबंधित तथ्यों और शिकायतों पर भी चर्चा की।
गौरतलब है कि नगर निकाय चुनावों के लिए मतदान 26 मई को संपन्न हुआ था। चुनाव के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच कई स्थानों पर विवाद की स्थिति भी देखने को मिली थी। धुरी की यह घटना भी उन्हीं घटनाओं में से एक रही, जिसने बाद में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बना लिया।
फिलहाल पंजाब एससी आयोग पूरे मामले की जांच और उपलब्ध तथ्यों की समीक्षा कर रहा है। आयोग की आगामी सुनवाई और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। वहीं इस मामले को लेकर पंजाब की राजनीति में भी बयानबाजी का दौर जारी है।