पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। कांग्रेस ने पेपर लीक, बरगाड़ी बेअदबी मामले और अन्य मुद्दों को लेकर विधानसभा के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। विपक्षी नेताओं के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए शुरुआत से ही यह माना जा रहा था कि सदन की कार्यवाही हंगामेदार रह सकती है और सरकार को कई मुद्दों पर विपक्ष के तीखे सवालों का सामना करना पड़ सकता है। गुरुवार सुबह कांग्रेस के विधायक काले परने (दुपट्टे) बांधकर विधानसभा परिसर पहुंचे और बरगाड़ी बेअदबी मामले में इंसाफ की मांग करते हुए राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि सरकार इस संवेदनशील मामले के आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रही है और वर्षों बाद भी पीड़ितों को न्याय नहीं मिल सका है।
विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य सरकार लगभग हर मोर्चे पर असफल साबित हुई है। उन्होंने कहा कि बरगाड़ी बेअदबी मामले में अब तक न्याय नहीं मिलना सरकार की सबसे बड़ी नाकामी है। बाजवा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को खुली बहस की चुनौती देते हुए कहा कि सरकार अपने सभी दावों को तथ्यों और सबूतों के साथ जनता के सामने रखे। विधानसभा परिसर के बाहर प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस विधायक प्रगट सिंह और कैबिनेट मंत्री गुरमीत सिंह ग्यासपुरा के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर राजनीतिक आरोप लगाए, जिससे कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया। वहां मौजूद अन्य नेताओं और सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति को संभाला, जिसके बाद मामला शांत हुआ।
प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाजी के बाद विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई। माना जा रहा है कि सदन के भीतर भी बरगाड़ी बेअदबी, पेपर लीक और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर विपक्ष सरकार को लगातार घेरने की कोशिश करेगा। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि जब तक इन मामलों में संतोषजनक जवाब और ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक वह अपने विरोध को जारी रखेगी। मानसून सत्र के आगामी दिनों में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और टकराव देखने को मिल सकता है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों की नजर इस बात पर बनी हुई है कि सरकार विपक्ष के आरोपों का क्या जवाब देती है और सदन की कार्यवाही किस दिशा में आगे बढ़ती