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बिजली बिल से पकड़ी जाएगी जीएसटी चोरी, प्रशासन की नई तैयारी

चंडीगढ़ प्रशासन का आबकारी एवं कराधान विभाग जीएसटी चोरी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अत्याधुनिक टैक्स इंटेलिजेंट सॉफ्टवेयर विकसित कर रहा है। यह डेटा एनालिटिक्स आधारित प्रणाली विभिन्न सरकारी विभागों से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण कर ऐसे कारोबारियों की पहचान करेगी, जो अपनी वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियों की तुलना में कम जीएसटी रिटर्न दाखिल करते हैं। प्रशासन का दावा है कि नई तकनीक से टैक्स चोरी पकड़ने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सटीक और तेज होगी। इस सॉफ्टवेयर में सबसे पहले बिजली विभाग से औद्योगिक इकाइयों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की मासिक बिजली खपत का रिकॉर्ड लिया जाएगा। विभाग का मानना है कि किसी फैक्टरी की बिजली खपत उसकी उत्पादन क्षमता का महत्वपूर्ण संकेतक होती है। यदि कोई उद्योग अधिक बिजली खर्च कर रहा है लेकिन जीएसटी रिटर्न में कम उत्पादन या बिक्री दिखा रहा है, तो सिस्टम उसे स्वतः संदिग्ध श्रेणी में चिन्हित कर देगा।

सिर्फ बिजली खपत ही नहीं, बल्कि नगर निगम से प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड, एस्टेट ऑफिस से औद्योगिक और व्यावसायिक संपत्तियों का विवरण, ट्रांसपोर्ट विभाग से माल परिवहन संबंधी जानकारी और अन्य सरकारी विभागों के आंकड़ों को भी एकीकृत किया जाएगा। इन सभी सूचनाओं का मिलान कर कारोबारी की वास्तविक आर्थिक गतिविधियों का आकलन किया जाएगा। आबकारी एवं कराधान विभाग के एईटीसी प्रद्युमन सिंह ने बताया कि इस सॉफ्टवेयर का उद्देश्य केवल जीएसटी चोरी रोकना नहीं, बल्कि ईमानदार करदाताओं के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करना भी है। इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच डेटा साझा करने की मजबूत व्यवस्था विकसित की जा रही है।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार कई कारोबारी वास्तविक उत्पादन और बिक्री की तुलना में कम कारोबार दिखाकर टैक्स बचाने का प्रयास करते हैं, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान होता है। नया सिस्टम अलग-अलग विभागों के रिकॉर्ड का मिलान कर ऐसे मामलों की पहचान करेगा और केवल डेटा में स्पष्ट असमानता मिलने पर ही जांच और कार्रवाई की जाएगी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद टैक्स निर्धारण केवल जीएसटी रिटर्न तक सीमित नहीं रहेगा। बिजली और पानी की खपत, संपत्ति का आकार, माल परिवहन और अन्य प्रशासनिक रिकॉर्ड के आधार पर भी वास्तविक कारोबार का अनुमान लगाया जाएगा। इससे टैक्स संग्रह बढ़ने के साथ-साथ जवाबदेही और पारदर्शिता भी मजबूत होगी।

प्रशासन के अनुसार जून 2026 में चंडीगढ़ का घरेलू जीएसटी संग्रह 229 करोड़ रुपये रहा, जो जून 2025 के 215 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 7 प्रतिशत अधिक है। हालांकि अप्रैल और मई के मुकाबले जून में संग्रह में गिरावट दर्ज की गई। वहीं अप्रैल से जून 2026 की पहली तिमाही में कुल जीएसटी संग्रह 908 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में बढ़ोतरी दर्शाता है। प्रशासन को उम्मीद है कि नया टैक्स इंटेलिजेंट सॉफ्टवेयर लागू होने के बाद जीएसटी चोरी पर प्रभावी रोक लगेगी और कर संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

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