पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन की कार्यवाही शुरू हो गई है। सरकार की ओर से आज नौ महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश किए जाने की तैयारी है। इनमें तीन नई डिजिटल यूनिवर्सिटी से जुड़े विधेयक भी शामिल हैं। वहीं, विधेयकों को लेकर विपक्ष ने सरकार पर जल्दबाजी का आरोप लगाते हुए सदन की कार्यवाही कुछ दिन बढ़ाने की मांग की है। सत्र शुरू होने से पहले विधानसभा परिसर में नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इतने महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के लिए विपक्ष को पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा है। पार्टी ने सरकार से सदन का समय बढ़ाने की मांग की है, ताकि सभी प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा हो सके। प्रताप बाजवा ने कहा कि विधेयकों पर चर्चा के लिए कम से कम तीन दिन का समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि नौ विधेयक एक ही दिन इतनी जल्दबाजी में लाने का क्या औचित्य है। बाजवा ने कहा कि सदन को कुछ दिनों के लिए बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि विधायकों को विधेयकों को पढ़ने और उनके प्रावधानों पर गंभीरता से चर्चा करने का अवसर मिल सके। बाजवा ने यह भी कहा कि विपक्ष के साथ जिस तरह से काम हो रहा है, उससे ऐसा लगता है कि महत्वपूर्ण विधायी विषयों पर पर्याप्त रुचि नहीं दिखाई जा रही। उन्होंने सरकार से प्रक्रिया को जल्दबाजी में पूरा करने के बजाय सभी पक्षों को चर्चा का पर्याप्त समय देने की मांग की।
विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष की आपत्ति पर कहा कि विधेयकों को 15 दिन पहले सदन में पेश करने के लिए दिया जाना चाहिए था। इस पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बहस की स्थिति बनी रही। कांग्रेस का कहना है कि अंतिम दिन एक साथ इतने विधेयक लाने से उन पर प्रभावी चर्चा करना मुश्किल होगा। कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने भी सदन की अवधि बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि विधेयकों को पढ़ने, उनके कानूनी प्रावधानों को समझने और जनता पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा करने के लिए एक दिन पर्याप्त नहीं है। खैरा के मुताबिक, इन विधेयकों का सीधा संबंध आम लोगों से है, इसलिए जल्दबाजी में इन्हें पारित करना उचित नहीं होगा। सरकार जिन विधेयकों को सदन में पेश कर सकती है, उनमें क्लाउड यूनिवर्सिटी होशियारपुर विधेयक-2026, एमएस डिजिटल यूनिवर्सिटी पटियाला विधेयक-2026 और फिजिक्सवाला डिजिटल यूनिवर्सिटी पटियाला विधेयक-2026 प्रमुख हैं। इन विधेयकों के जरिए राज्य में डिजिटल और निजी क्षेत्र की उच्च शिक्षा से जुड़े नए संस्थानों को स्थापित करने का रास्ता तैयार किया जा सकता है। इसके अलावा पंजाब कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर (रेगुलेशन एंड मेंटेनेंस) संशोधन विधेयक-2026 भी सदन में लाया जा सकता है। इस विधेयक में औद्योगिक क्षेत्रों के बेहतर प्रबंधन के लिए गठित विशेष प्रयोजन वाहन यानी SPV की प्रभावशीलता, पारदर्शिता और वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने से जुड़े प्रावधान किए जाने हैं।
पंजाब वस्तु एवं सेवा कर यानी GST संशोधन विधेयक-2026 भी प्रस्तावित विधेयकों में शामिल है। इसमें बिक्री के बाद दी जाने वाली छूट से संबंधित प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव है। इसके तहत पूर्व समझौते की शर्त के बिना क्रेडिट नोट जारी कर आपूर्ति की कीमत से ऐसी छूट को बाहर रखने की अनुमति देने का प्रावधान बताया गया है। पंजाब स्टेट आउटसोर्स्ड ट्रांजिशन टू कॉन्ट्रैक्चुअल एंगेजमेंट विधेयक-2026 के जरिए जोखिम वाली श्रेणियों में तैनात कर्मचारियों को तीन साल की सेवा पूरी करने के बाद सीधे अनुबंध पर लाने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इस विधेयक को लेकर भी सदन में चर्चा और राजनीतिक बहस होने की संभावना है। इसके साथ ही पंचायती राज संशोधन विधेयक-2026 और बिना सहायता प्राप्त निजी स्कूलों में फीस से जुड़े विधेयक भी सदन में पेश किए जाने की संभावना है। निजी स्कूलों की फीस और पंचायती राज व्यवस्था से जुड़े इन प्रस्तावों का सीधा असर आम लोगों और स्थानीय प्रशासन से जुड़े वर्गों पर पड़ सकता है।
विपक्ष का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण विधेयकों को एक ही दिन में पेश करने और उन पर चर्चा कराने से विधायकों को पर्याप्त तैयारी का समय नहीं मिलेगा। कांग्रेस का तर्क है कि विधेयकों के प्रावधानों को समझने के लिए समय मिलना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा है। वहीं सरकार की ओर से इन विधेयकों को सदन की निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाने की तैयारी है। ऐसे में अंतिम दिन विधानसभा की कार्यवाही के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामे के आसार बने हुए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विधानसभा अध्यक्ष और सरकार विपक्ष की सदन का समय बढ़ाने की मांग को स्वीकार करेंगे या अंतिम दिन ही सभी विधेयकों पर चर्चा और विधायी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन की कार्यवाही पर अब सभी की नजरें टिकी हैं।