हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र 27 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। सत्र शुरू होने से पहले ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक तैयारियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस ने सरकार को घेरने के लिए हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN), बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था, सरकारी भर्तियों और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की रणनीति बनाई है। वहीं भाजपा भी विपक्ष के हमलों का जवाब देने के लिए तैयार है। ऐसे में इस बार विधानसभा की कार्यवाही के दौरान तीखी बहस और हंगामे के आसार नजर आ रहे हैं। सत्ता पक्ष की ओर से वरिष्ठ भाजपा नेता और कैबिनेट मंत्री अनिल विज की भूमिका अहम रहने की संभावना है। विधानसभा में विपक्ष के सवालों का तथ्यात्मक जवाब देने और सरकार का पक्ष मजबूती से रखने के लिए विज पहले भी अपनी बेबाक शैली के लिए जाने जाते रहे हैं। उनके अलावा कैबिनेट मंत्री महिपाल ढांडा और कृष्ण बेदी भी अलग-अलग विभागों से जुड़े सवालों पर विपक्ष का जवाब देते नजर आ सकते हैं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी सत्र के दौरान सरकार की रणनीति का नेतृत्व कर सकते हैं। सरकार की कोशिश रहेगी कि विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के साथ-साथ अपनी नीतियों, विकास कार्यों और रोजगार से जुड़े फैसलों को सदन के सामने रखा जाए। संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों पर मुख्यमंत्री खुद हस्तक्षेप कर सकते हैं। विपक्षी कांग्रेस की ओर से भी कई अनुभवी विधायक सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। भारत भूषण बत्रा, अशोक अरोड़ा और गीता भुक्कल जैसे वरिष्ठ नेता विभिन्न मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग सकते हैं। कांग्रेस की रणनीति में रोजगार, सरकारी भर्तियां, कानून-व्यवस्था और जनहित से जुड़े सवाल प्रमुख रह सकते हैं। एचकेआरएन इस सत्र में विपक्ष का बड़ा हथियार बन सकता है। कांग्रेस सरकार से निगम के माध्यम से होने वाली नियुक्तियों, कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा, भर्ती प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर सवाल कर सकती है। विपक्ष यह मुद्दा भी उठा सकता है कि नियमित सरकारी भर्तियों के बजाय संविदा या अस्थायी रोजगार पर निर्भरता से युवाओं के भविष्य पर क्या असर पड़ रहा है।
बेरोजगारी का मुद्दा भी विधानसभा में जोरदार तरीके से उठने की संभावना है। कांग्रेस सरकारी विभागों में खाली पदों, भर्ती प्रक्रिया, लंबित भर्तियों और युवाओं के रोजगार से जुड़े सवाल सरकार के सामने रख सकती है। इसके जवाब में सरकार रोजगार उपलब्ध कराने, नई भर्तियों और विभिन्न विभागों में किए गए प्रयासों का आंकड़ा सदन में रख सकती है। कानून-व्यवस्था भी विपक्ष के निशाने पर रह सकती है। कांग्रेस आपराधिक घटनाओं, पुलिस व्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मामलों को लेकर सरकार से जवाब मांग सकती है। सत्ता पक्ष पुलिस की कार्रवाई, अपराध नियंत्रण और प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों का हवाला देकर विपक्ष के आरोपों का जवाब देगा। इस मुद्दे पर सदन में राजनीतिक तापमान बढ़ने की संभावना है। सत्र के दौरान सज्जन कुमार प्रकरण भी राजनीतिक बहस का विषय बन सकता है। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा की ओर से सज्जन कुमार की मृत्यु के बाद दिए गए बयानों को भाजपा विधायक सदन में उठा सकते हैं। सत्ता पक्ष इस मुद्दे को कांग्रेस की राजनीतिक सोच और उसके नेताओं के बयानों से जोड़कर विपक्ष को घेरने की कोशिश कर सकता है। इससे सदन में पहले से मौजूद राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है।
विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण के सामने भी सदन की कार्यवाही को सुचारु बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी। उन्होंने सत्र की तैयारियों को लेकर प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठकें की हैं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हरियाणा और चंडीगढ़ के संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं, ताकि सत्र के दौरान किसी तरह की सुरक्षा समस्या न हो। विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की बैठक व्यवस्था, तकनीकी सुविधाओं और अन्य जरूरी तैयारियों का भी जायजा लिया है। उनका प्रयास रहेगा कि प्रश्नकाल और विधायी कार्यवाही निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार चले और जनता से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के बावजूद सदन की कार्यवाही बाधित न हो, यह अध्यक्ष के लिए सबसे बड़ी चुनौती रहेगी। इस सत्र में युवा कांग्रेस विधायक भी अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर सकते हैं। रोजगार, शिक्षा, भर्ती, युवाओं से जुड़े मुद्दों और स्थानीय समस्याओं को उठाकर वे सरकार को घेरने का प्रयास करेंगे। वहीं भाजपा के युवा विधायक भी सरकार की नीतियों और उपलब्धियों का बचाव करते हुए विपक्ष को जवाब देने की रणनीति अपना सकते हैं।
27 अगस्त से शुरू होने वाला मानसून सत्र इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें सरकार को अपनी नीतियों और कामकाज का हिसाब सदन में रखना होगा, जबकि विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही तय करने की कोशिश करेगा। एचकेआरएन, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर जोरदार बहस की संभावना है। कुल मिलाकर इस बार का मानसून सत्र राजनीतिक रूप से काफी अहम रहने वाला है। एक तरफ सरकार अपनी उपलब्धियों और नीतियों को मजबूती से रखने की तैयारी में है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस सरकार की कमियों को सदन में उठाकर उसे घेरने की कोशिश करेगी। अनुभवी नेताओं की मौजूदगी और कई संवेदनशील मुद्दों को देखते हुए सदन में तीखी नोकझोंक और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।