उत्तराखंड में यमुना नदी से जुड़े धार्मिक पर्यटन को नई पहचान देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। देहरादून जिले के कालसी क्षेत्र के हरिपुर में राज्य का पहला यमुना घाट बनकर तैयार हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 17 सितंबर को इस नवनिर्मित घाट का विधिवत लोकार्पण करेंगे। यह लोकार्पण कार्यक्रम धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से भी खास रहने वाला है। विश्वकर्मा दिवस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में संत समाज की मौजूदगी रहेगी। इसी दौरान मां यमुना की प्रथम पूजा और आरती भी की जाएगी। बताया गया है कि कार्यक्रम में होने वाली आरती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से होगी। सरकार की कोशिश है कि इस आयोजन के जरिए हरिपुर को यमुना नदी से जुड़े एक प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में स्थापित करने की दिशा में नई शुरुआत की जाए। हरिद्वार को जिस तरह गंगा के मैदानी क्षेत्र में प्रवेश के कारण विशेष धार्मिक पहचान मिली है, उसी तर्ज पर हरिपुर को यमुना के मैदानी क्षेत्र के प्रथम प्रवेश स्थल के तौर पर विकसित करने की योजना बनाई गई है। इसी सोच के साथ हरिपुर को ‘यमुनाद्वार’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य हरिपुर को केवल एक नदी घाट तक सीमित रखना नहीं है। यहां धार्मिक गतिविधियों के साथ पर्यटन सुविधाओं का विकास कर इसे उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों में शामिल करने की योजना पर काम किया जा रहा है। हरिपुर में घाट निर्माण की प्रक्रिया करीब दो वर्ष पहले शुरू हुई थी। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण यानी एमडीडीए की ओर से यहां घाट का निर्माण कराया गया। इस परियोजना का शिलान्यास मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया था। अब निर्माण कार्य पूरा होने के बाद 17 सितंबर को घाट का औपचारिक लोकार्पण किया जाएगा। इसके साथ ही हरिपुर को धार्मिक पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की सरकार की योजना को भी गति मिलने की उम्मीद है। लोकार्पण कार्यक्रम को धार्मिक स्वरूप देने की तैयारियां भी की जा रही हैं। इसके लिए संत समाज को आमंत्रित किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान मां यमुना की पूजा-अर्चना के बाद आरती की जाएगी।
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देश पर लोकार्पण कार्यक्रम की तैयारियां की जा रही हैं। संत समाज की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए उन्हें कार्यक्रम में आमंत्रित किया जा रहा है। हरिपुर की खासियत केवल यमुना नदी का यहां से होकर गुजरना नहीं है। इस क्षेत्र में यमुना के साथ टौंस यानी तमसा, अमलावा और नौरा नदियों का संगम भी होता है। चार नदियों का यह संगम हरिपुर को भौगोलिक और धार्मिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण बनाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार प्राचीन समय से ही इस क्षेत्र में धार्मिक अनुष्ठानों की परंपरा रही है। यहां यज्ञ, पिंडदान, अस्थि विसर्जन और विभिन्न वैदिक संस्कार किए जाने की मान्यताएं मिलती हैं। जौनसार-बावर और आसपास के क्षेत्रों के लोग भी लंबे समय से धार्मिक अनुष्ठानों के लिए हरिपुर पहुंचते रहे हैं। ऐसे में नए घाट के निर्माण से इन धार्मिक गतिविधियों के लिए श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। कालसी-हरिपुर क्षेत्र का संबंध प्राचीन कुलिंद साम्राज्य से भी जोड़ा जाता है। स्थानीय लोक परंपराओं में ऋषि-मुनियों के आश्रम, यज्ञ स्थलों और राजा अम्बरीष से जुड़े कई प्रसंगों का उल्लेख मिलता है। हालांकि, इन लोकविश्वासों और परंपराओं से जुड़े सभी दावों के पर्याप्त ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसके बावजूद स्थानीय सांस्कृतिक स्मृति और धार्मिक पहचान में इन मान्यताओं की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
स्थानीय लोक परंपराओं के मुताबिक, प्राचीन समय में किसी आपदा या अन्य परिस्थितियों के कारण हरिपुर की तीर्थ पहचान धीरे-धीरे कमजोर होती चली गई। अब सरकार विकास और धार्मिक पर्यटन के माध्यम से इस क्षेत्र की पुरानी पहचान को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रही है। यमुना नदी के किनारे आधुनिक सुविधाओं से युक्त घाट का निर्माण इसी प्रयास का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। इससे श्रद्धालुओं को पूजा-पाठ, स्नान, पिंडदान और अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए बेहतर व्यवस्था मिल सकती है। हरिपुर को ‘यमुनाद्वार’ के रूप में विकसित करने की योजना उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन को विस्तार देने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। राज्य पहले से ही चारधाम, हरिद्वार, ऋषिकेश और अन्य धार्मिक स्थलों के कारण देश-विदेश में पहचान रखता है। ऐसे में यमुना के मैदानी क्षेत्र में प्रवेश वाले इस स्थल को विकसित करने से धार्मिक पर्यटन का एक नया सर्किट तैयार होने की संभावना है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार, कारोबार और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार की कोशिश है कि हरिपुर में श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था के साथ बेहतर पर्यटन सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं। आने वाले समय में यहां बुनियादी सुविधाओं और अन्य पर्यटन परियोजनाओं को विस्तार देने की दिशा में काम होने की संभावना है। 17 सितंबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हाथों घाट के लोकार्पण के बाद हरिपुर को लेकर सरकार की आगामी योजनाएं और अधिक स्पष्ट हो सकती हैं। अब यह देखना अहम होगा कि नया यमुना घाट हरिपुर की धार्मिक पहचान और उत्तराखंड के पर्यटन मानचित्र को कितना विस्तार देता है।