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रिश्तों से नहीं, अब रसोई से होगी परिवार की पहचान!

देहरादून में चल रही मकान सूचीकरण और मकान गणना प्रक्रिया के बीच लोगों के मन में यह सवाल बना हुआ था कि आखिर एक घर में कितने परिवार माने जाएंगे। अब जनगणना निदेशालय ने इसे लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि किसी भी मकान में परिवार की गिनती का आधार उसकी रसोई होगी। यानी जो लोग एक ही रसोई से भोजन करते हैं, उन्हें एक परिवार माना जाएगा।

निर्देशों के अनुसार यदि दादा-दादी, माता-पिता और बच्चे एक साथ रहते हैं और एक ही रसोई में भोजन बनता है, तो उन्हें संयुक्त परिवार के रूप में एक परिवार माना जाएगा। वहीं अगर एक ही घर में अलग-अलग रसोई हैं, तो हर रसोई के हिसाब से अलग परिवार गिने जाएंगे। जनगणना निदेशालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर दो दोस्त एक साथ रहते हैं और एक ही रसोई से भोजन करते हैं, तो उन्हें भी एक परिवार माना जाएगा।

इसी तरह यदि कोई घरेलू सहायिका अपने मालिक के परिवार के साथ एक ही रसोई से भोजन करती है, तो वह भी उसी परिवार का हिस्सा मानी जाएगी। कई घरों में माता-पिता और बेटों की अलग-अलग रसोई होती हैं। ऐसे मामलों में हर अलग रसोई को एक अलग परिवार माना जाएगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी मकान में तीन अलग-अलग रसोई हैं, तो वहां तीन परिवार दर्ज किए जाएंगे।

जनगणना निदेशालय के मुताबिक प्रदेशभर में मकान सूचीकरण और मकान गणना का पहला चरण 24 मई तक जारी रहेगा। इसके लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। नए नियमों के बाद अब जनगणना में परिवार की पहचान रिश्तों से ज्यादा रसोई के आधार पर तय की जाएगी, जिससे गणना प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।

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