रुद्रपुर: उधम सिंह नगर के लालपुर स्थित एक निजी फार्मा कंपनी में गुरुवार को कर्मचारियों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया। कंपनी के एचआर विभाग पर कथित अभद्र व्यवहार, श्रमिक उत्पीड़न, पीएफ-ईएसआई सुविधाओं में अनियमितता और समय पर वेतन न मिलने के आरोप लगाते हुए करीब 300 कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से कार्य बहिष्कार कर श्रम विभाग कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से उनकी शिकायतों की अनदेखी की जा रही है। समस्याएं उठाने पर उन्हें दबाव में लिया जाता है और नौकरी से निकालने तक की धमकी दी जाती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए श्रम विभाग ने कंपनी प्रबंधन को तलब कर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सैकड़ों कर्मचारियों ने किया कार्य बहिष्कार
जानकारी के अनुसार, किच्छा रोड स्थित लालपुर क्षेत्र की एक निजी फार्मा कंपनी के कर्मचारियों ने एकजुट होकर काम बंद कर दिया और श्रम विभाग कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए श्रम कानूनों के पालन और कार्यस्थल पर सम्मानजनक माहौल सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
एचआर विभाग पर लगाए गंभीर आरोप
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि छुट्टी, गेट पास या अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए एचआर विभाग से संपर्क करने पर उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया जाता है। कई कर्मचारियों का आरोप है कि विरोध करने पर सार्वजनिक रूप से फटकार लगाई जाती है और नौकरी समाप्त करने की चेतावनी दी जाती है। उनका कहना है कि इस तरह का व्यवहार कर्मचारियों के आत्मसम्मान को प्रभावित करता है और कार्यस्थल का वातावरण लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है।
महिला कर्मचारियों ने भी जताई नाराजगी
प्रदर्शन में शामिल महिला कर्मचारियों ने भी कार्यस्थल पर सम्मानजनक व्यवहार नहीं मिलने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि कई अवसरों पर उनके साथ अनुचित भाषा का प्रयोग किया गया। महिला कर्मचारियों ने मांग की कि कार्यस्थल पर उनकी सुरक्षा, सम्मान और शिकायतों के निष्पक्ष निस्तारण के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
PF, ESI और वेतन भुगतान पर भी उठे सवाल
कर्मचारियों का आरोप है कि कई वर्षों से कार्यरत होने के बावजूद उन्हें कर्मचारी भविष्य निधि (PF) और कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) जैसी वैधानिक सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। इसके अलावा उन्होंने वेतन भुगतान में लगातार देरी और अनियमितता का भी आरोप लगाया। कर्मचारियों का कहना है कि कई बार बिना स्पष्ट कारण के वेतन रोका जाता है या निर्धारित समय से काफी देर बाद भुगतान किया जाता है, जिससे आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
शिकायत करने पर दबाव बनाने का आरोप
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्होंने कई बार कंपनी प्रबंधन को लिखित एवं मौखिक रूप से अपनी समस्याओं से अवगत कराया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि शिकायत करने वाले कर्मचारियों पर दबाव बनाया गया और उन्हें नौकरी छोड़ने तक की चेतावनी दी गई। इसी के विरोध में कर्मचारियों ने सामूहिक आंदोलन का निर्णय लिया।
श्रम विभाग ने शुरू की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए सहायक श्रम आयुक्त अरविंद सैनी ने कर्मचारियों और कंपनी प्रबंधन को वार्ता के लिए बुलाया।
उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद कंपनी प्रबंधन को निर्देश दिए गए हैं कि—
- कार्यस्थल पर कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।
- महिला कर्मचारियों की शिकायतों पर संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई की जाए।
- उत्तराखंड सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन समय पर कर्मचारियों के बैंक खातों में जमा किया जाए।
- पीएफ, ईएसआई और अन्य सभी वैधानिक सुविधाएं श्रम कानूनों के अनुरूप उपलब्ध कराई जाएं।
नियमों के उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
सहायक श्रम आयुक्त ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में श्रम कानूनों के उल्लंघन या कर्मचारियों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो कंपनी प्रबंधन के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल श्रम विभाग पूरे मामले की जांच कर रहा है। वहीं कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।