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565 करोड़ का वाटर प्रोजेक्ट, 20 साल का इंतजार! कब मिलेगा पटियाला को 24 घंटे साफ पानी?

पटियाला शहर के लोगों को 24 घंटे साफ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए करीब दो दशक पहले घोषित किया गया नहर आधारित वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट अब भी पूरी तरह शुरू होने का इंतजार कर रहा है। वर्ष 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से घोषित इस महत्वाकांक्षी परियोजना को कई वर्षों तक अलग-अलग कारणों से देरी का सामना करना पड़ा। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य पटियाला शहर में लंबे समय से बनी पानी की कमी की समस्या को दूर करना और भूजल पर निर्भरता कम करना था। योजना के तहत शहरवासियों को नहर के पानी को शुद्ध करने के बाद पाइपलाइन के जरिए नियमित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाना है। लेकिन घोषणा के बाद यह परियोजना कभी सरकारी औपचारिकताओं, कभी जमीन की उपलब्धता और कभी टेंडर प्रक्रिया में देरी के कारण आगे नहीं बढ़ सकी। कई साल तक कागजी और प्रशासनिक अड़चनों में फंसे रहने के बाद आखिरकार 13 अक्तूबर 2020 को इसका निर्माण कार्य शुरू किया गया।

परियोजना को मूल रूप से अक्तूबर 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी पटियाला शहर को नहरी पानी की नियमित सप्लाई शुरू नहीं हो सकी। अब एक बार फिर शहरवासियों की उम्मीद जगी है। पंजाब वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड का दावा है कि परियोजना का अधिकांश काम पूरा हो चुका है और पहले चरण के जरिए जल्द कुछ इलाकों में नहरी पानी की सप्लाई शुरू की जा सकती है। वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर विकास धवन के अनुसार, प्रोजेक्ट का करीब 94 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। फिलहाल सिस्टम की टेस्टिंग का काम जारी है और पहले चरण को अंतिम रूप देने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक 31 अक्तूबर 2026 तक परियोजना का पहला चरण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद मजीठिया एनक्लेव, आनंद नगर, आनंद नगर एक्सटेंशन, गुरदर्शन नगर और प्रेम नगर सहित कुछ इलाकों में ट्रीटमेंट के बाद नहर का पानी पहुंचाने की योजना है।

करीब 565 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना का उद्देश्य लगभग पांच लाख की आबादी को 24 घंटे साफ पेयजल उपलब्ध कराना है। परियोजना की कुल लागत में अगले 10 वर्षों के रखरखाव का खर्च भी शामिल बताया गया है। पंजाब वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड ने इस परियोजना के निर्माण का ठेका एलएंडटी को करीब 341 करोड़ रुपये में दिया था। इतने बड़े बजट और लंबे समय के बावजूद परियोजना का निर्धारित समय पर पूरा नहीं होना प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता रहा है। परियोजना के तहत भाखड़ा नहर से पानी लेकर गांव अबलोवाल तक पहुंचाया जाना है। वहां बनाए गए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में पानी का शोधन किया जाएगा, जिसके बाद इसे पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए पटियाला शहर के विभिन्न इलाकों तक पहुंचाया जाएगा। अबलोवाल में करीब 115 एमएलडी क्षमता का आधुनिक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार किया जा चुका है। इसके साथ ही पानी के भंडारण के लिए दो बड़े स्टोरेज टैंक भी बनाए गए हैं।

शहर में अब तक करीब 240 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है। यही नेटवर्क आने वाले समय में नहरी पानी को अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा। इस परियोजना के लंबे समय तक लटकने के पीछे कई कारण सामने आते रहे हैं। वर्ष 2006 में घोषणा के बाद योजना अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाई और शुरुआती वर्षों में प्रशासनिक मंजूरियों तथा जमीन से जुड़े मामलों में देरी होती रही। साल 2017 में पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार बनने के बाद इस परियोजना को दोबारा तेजी से आगे बढ़ाने की बात कही गई। हालांकि इसके बावजूद काम तय रफ्तार से पूरा नहीं हो सका।

मई 2021 में अबलोवाल में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण कार्य को गति मिली। उस समय भी परियोजना को जल्द पूरा करने के दावे किए गए, लेकिन बाद के वर्षों में विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से देरी जारी रही। साल 2022 में पानी की टंकियों और अन्य ढांचागत सुविधाओं के लिए नगर निगम की जमीन उपलब्ध कराने का मुद्दा भी सामने आया। जमीन से जुड़े मामलों के कारण परियोजना की कई कड़ियां समय पर पूरी नहीं हो सकीं। परियोजना की मूल डेडलाइन अक्तूबर 2023 थी, लेकिन इसके बाद समय सीमा लगातार बढ़ती गई। पहले इसे 2024 के मध्य तक पूरा करने की बात कही गई, फिर जुलाई 2025 और बाद में 2025 के अंत तक नई समय सीमा तय की गई । लगातार देरी को लेकर पंजाब वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड ने निर्माण कंपनी एलएंडटी पर कार्रवाई भी की। देरी के कारण कंपनी पर अब तक करीब 20.7 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है।

जनवरी 2026 में तत्कालीन पटियाला डीसी ने अधिकारियों को 31 मार्च 2026 तक परियोजना पूरा करने के निर्देश दिए थे। लेकिन यह समय सीमा भी निकल गई और शहरवासियों का इंतजार लगातार बढ़ता रहा। इसके बाद जून 2026 में डीसी डॉ. हिमांशु अग्रवाल ने परियोजना की समीक्षा करते हुए इसे 30 सितंबर 2026 तक हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए। अब अधिकारियों की ओर से 31 अक्तूबर तक पहले चरण को पूरा करने की बात कही जा रही है। इस परियोजना से पटियाला के लोगों को बड़ी उम्मीद है क्योंकि शहर में लगातार गिरते भूजल स्तर के कारण ट्यूबवेलों पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। लंबे समय तक भूजल के अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई जाती रही है। नहर आधारित पानी की सप्लाई शुरू होने के बाद शहर को भूजल के बजाय एक स्थायी जल स्रोत मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल लोगों को नियमित और साफ पेयजल मिल सकेगा, बल्कि भूजल पर बढ़ते दबाव को कम करने में भी मदद मिल सकती है।

नगर निगम के मेयर कुंदन गोगिया ने बताया कि परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले डेढ़ से दो महीने में पहले चरण का काम पूरा होने के बाद कुछ क्षेत्रों में नहरी पानी की सप्लाई शुरू हो सकती है। पटियाला शहरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक अजीत पाल सिंह कोहली ने भी कहा है कि परियोजना का पहला चरण जल्द पूरा होने वाला है। उनका कहना है कि सरकार की कोशिश है कि वादे के अनुसार पटियाला के लोगों को जल्द साफ और नियमित पेयजल उपलब्ध कराया जाए। करीब 20 साल के लंबे इंतजार के बाद अब पटियालावासियों की नजर 31 अक्तूबर की नई समय सीमा पर टिकी हुई है। अगर पहला चरण तय समय पर पूरा होता है तो शहर के कुछ इलाकों को पहली बार ट्रीटमेंट के बाद नियमित नहरी पानी की सप्लाई मिलनी शुरू हो सकती है। हालांकि परियोजना का पूरा लाभ शहर की करीब पांच लाख आबादी तक पहुंचाने के लिए बाकी चरणों का समय पर पूरा होना भी बेहद जरूरी होगा। ऐसे में आने वाले महीने इस महत्वाकांक्षी परियोजना और पटियाला की पेयजल व्यवस्था के लिए काफी अहम साबित हो सकते हैं।

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