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अबोहर मेयर चुनाव रद्द होने के बाद सियासत गरम, भाजपा ने राज्यपाल से लगाई गुहार

अबोहर नगर निगम के मेयर चुनाव को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजभवन तक पहुंच गया है। शनिवार को भाजपा के प्रदेश प्रधान केवल सिंह ढिल्लों के नेतृत्व में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़, अश्वनी शर्मा सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। भाजपा ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रक्षा करने की मांग की। दरअसल शुक्रवार देर रात जिला प्रशासन ने अबोहर नगर निगम के मेयर चुनाव को रद्द कर दिया था। चुनाव के दौरान धांधली के आरोप, विपक्ष के विरोध और विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन ने यह बड़ा फैसला लिया। अब मेयर पद के लिए नई तारीख घोषित कर दोबारा चुनाव कराया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करने के बाद ही नया मतदान कराया जाएगा। भाजपा का दावा है कि नगर निगम में उसके पास स्पष्ट बहुमत था। पार्टी के अनुसार भाजपा के 28 पार्षद थे और विधायक के मतदान अधिकार को जोड़ने पर कुल 29 वोट उनके पक्ष में बनते थे। इसके बावजूद आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार गणेश सबलानिया को विजेता घोषित कर दिया गया, जिस पर भाजपा ने गंभीर सवाल उठाए और चुनाव प्रक्रिया को असंवैधानिक बताया।

 वहीं आम आदमी पार्टी ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि उनके पक्ष में 27 पार्षदों ने हाथ उठाकर समर्थन दिया था। पार्टी का कहना है कि चुनाव अधिकारी ने इसी समर्थन के आधार पर गणेश सबलानिया को विजयी घोषित किया। इस दावे के बाद दोनों दलों के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया। परिणाम घोषित होने के बाद नगर निगम परिसर में भाजपा नेताओं और पार्षदों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ मौके पर पहुंचे और आरोप लगाया कि बहुमत होने के बावजूद भाजपा उम्मीदवार को जानबूझकर हराया गया। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। विवाद बढ़ने के बाद सुनील जाखड़ और जिला उपायुक्त के बीच करीब तीन घंटे तक बैठक हुई। बैठक में भाजपा नेताओं ने कथित अनियमितताओं से जुड़े सभी तथ्यों को प्रशासन के सामने रखा। लंबे विचार-विमर्श के बाद जिला प्रशासन ने शुक्रवार को हुए मेयर चुनाव को रद्द करने का फैसला सुनाया। भाजपा ने इसे लोकतंत्र और अपने पार्षदों की जीत बताते हुए विश्वास जताया कि दोबारा होने वाले चुनाव में वास्तविक बहुमत का सम्मान किया जाएगा।

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