पंजाब कांग्रेस में जारी अंदरूनी खींचतान के बीच पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल के बीच अहम बैठक शुरू हो गई है। यह बैठक विधायक राणा गुरजीत सिंह के आवास पर हो रही है, जहां कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद हैं। माना जा रहा है कि पार्टी के भीतर चल रहे मतभेद, संगठनात्मक मुद्दों और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। बैठक से पहले चरणजीत सिंह चन्नी के बयान “तेल देखेंगे और तेल की धार, फिर अगला फैसला लेंगे” ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी। उनके इस बयान को लेकर कई तरह की राजनीतिक अटकलें लगाई जा रही हैं। माना जा रहा है कि बैठक के नतीजों के आधार पर चन्नी गुट अपनी आगे की रणनीति तय करेगा। बैठक में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं पंजाब प्रभारी सूरज ठाकुर भी पहुंचे हैं। इसके अलावा दिवंगत पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह सिद्धू की मौजूदगी ने भी बैठक को राजनीतिक रूप से और अहम बना दिया है। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और विधायक भी बैठक में शामिल हुए हैं।
राणा गुरजीत सिंह के आवास पर हुई इस बैठक में चरणजीत सिंह चन्नी, प्रताप सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा, परगट सिंह, भारत भूषण आशू, संगत सिंह गिलजियां, त्रिप्त राजिंदर सिंह बाजवा, अरुण चौधरी, वरिंदर सिंह पाड़ा और कुलदीप सिंह काका ढिल्लों समेत कई वरिष्ठ नेता पहुंचे। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी के भीतर चल रहे विवाद को सुलझाने की गंभीर कोशिश की जा रही है। प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। वड़िंग का कहना है कि उन्हें बैठक का निमंत्रण नहीं मिला, इसलिए वे शामिल नहीं हुए। वहीं पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते उन्हें अलग से बुलाने की आवश्यकता नहीं थी। विधायक परगट सिंह ने भी स्पष्ट किया कि यह बगावत नहीं बल्कि विचारों का मतभेद है, जिसे बातचीत के जरिए दूर किया जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक चन्नी समर्थक आगामी विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने की मांग पर अड़े हुए हैं। समर्थक इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस हाईकमान पर दबाव बना रहे हैं और जल्द शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की तैयारी भी कर रहे हैं। उनका मानना है कि पंजाब में चन्नी पार्टी का मजबूत दलित चेहरा हैं और चुनाव उनके नेतृत्व में लड़ा जाना चाहिए। हालांकि प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल ने पहले ही पार्टी की स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस विधानसभा चुनाव से पहले किसी भी नेता को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं करेगी और प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को बदलने का भी कोई सवाल नहीं है। बघेल के इस बयान के बाद चन्नी गुट की मांगों को लेकर संशय और बढ़ गया है।
भूपेश बघेल ने अनुशासन के मुद्दे पर भी सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि पार्टी विरोधी गतिविधियों या सार्वजनिक रूप से नेतृत्व के खिलाफ बयानबाजी करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी और जरूरत पड़ने पर संबंधित नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है। अब राजनीतिक गलियारों की नजर इस बैठक के नतीजों पर टिकी है। माना जा रहा है कि यदि बातचीत सकारात्मक रही तो पंजाब कांग्रेस में जारी विवाद कम हो सकता है, लेकिन यदि सहमति नहीं बनती है तो आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर सियासी टकराव और बढ़ सकता है।