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दुनिया का सबसे तेज स्टेनो ED के पास”, कोर्ट में वकील का तंज

पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई और अपनी गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने अदालत में दायर याचिका के जरिए दावा किया कि उन्हें एक खतरनाक अपराधी की तरह पेश किया जा रहा है, जबकि उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और न ही उनके फरार होने या सबूतों से छेड़छाड़ करने की वास्तविक संभावना है। मुख्य न्यायाधीश की अदालत में सुनवाई के दौरान अरोड़ा के वकील ने कहा कि ईडी की पूरी कार्रवाई संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। बचाव पक्ष का आरोप है कि 9 मई की सुबह करीब 7 बजे ईडी की टीम मंत्री संजीव अरोड़ा के सरकारी आवास पहुंची थी और उसी समय से उन्हें प्रभावी रूप से हिरासत में रखा गया। हालांकि एजेंसी ने उनकी औपचारिक गिरफ्तारी शाम 4 बजे दर्ज की। याचिका में कहा गया कि यह कदम संविधान में दिए गए सुरक्षा प्रावधानों को कमजोर करने की कोशिश है।

संजीव अरोड़ा ने अदालत में कहा कि वह कोई भगोड़ा, तस्कर या सीमा पार गतिविधियों में शामिल व्यक्ति नहीं हैं। जिन लेनदेन को लेकर जांच की जा रही है, वे वर्ष 2023-24 के हैं, उस समय वह केवल एक कारोबारी थे और राजनीति में सक्रिय नहीं थे। उन्होंने कहा कि राजनीति में आने के बाद वह संबंधित कंपनी के निदेशक भी नहीं रहे। ऐसे में उन्हें साक्ष्य मिटाने वाला या जांच से भागने वाला व्यक्ति बताना गलत है। सुनवाई के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हुई कि ईडी ने गिरफ्तारी के आधार से जुड़ा 17 पन्नों का दस्तावेज केवल 35 मिनट में कैसे तैयार कर लिया। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि दोपहर 3:25 बजे बयान दर्ज होने के बाद इतने कम समय में विस्तृत दस्तावेज तैयार होना असंभव जैसा है। वकील ने कटाक्ष करते हुए कहा कि शायद ईडी के पास “दुनिया का सबसे तेज स्टेनोग्राफर” है।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि जब किसी व्यक्ति की आवाजाही और स्वतंत्रता सीमित कर दी जाती है, उसी समय से हिरासत मानी जानी चाहिए। ऐसे में गिरफ्तारी का समय बाद में दिखाना अनुच्छेद 21 के तहत मिले व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार और 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने के नियम को प्रभावित करता है। अब इस मामले में अदालत की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह मामला केवल एक मंत्री की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं बल्कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई और संवैधानिक प्रक्रियाओं को लेकर भी अहम माना जा रहा है।

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