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मुख्यमंत्री धामी का नया कीर्तिमान, एनडी तिवारी का रिकॉर्ड पीछे छूटा

उत्तराखंड की राजनीति हमेशा से नेतृत्व परिवर्तन के लिए चर्चा में रही है। राज्य गठन के बाद कई मुख्यमंत्री आए और गए, लेकिन बहुत कम ऐसे नेता रहे जो लंबे समय तक सत्ता की कमान संभाल सके। अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसी इतिहास में अपना नाम दर्ज करा दिया है। 4 जुलाई 2026 को उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के लंबे कार्यकाल के रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए उसे पीछे छोड़ने की दिशा में नया अध्याय लिख दिया। लगातार मुख्यमंत्री बने रहने के मामले में धामी अब उत्तराखंड के सबसे लंबे समय तक पद संभालने वाले नेताओं की सूची में शीर्ष स्थान पर पहुंच गए हैं।

उत्तराखंड बनने के बाद राज्य की राजनीति में कई बार नेतृत्व परिवर्तन देखने को मिला। अलग-अलग सरकारों के दौरान मुख्यमंत्री बदले गए और कई नेताओं का कार्यकाल बीच में ही समाप्त हो गया। ऐसे माहौल में जुलाई 2021 में भाजपा नेतृत्व ने युवा चेहरे के रूप में पुष्कर सिंह धामी पर भरोसा जताया और उन्हें राज्य की कमान सौंपी। 4 जुलाई 2021 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने दोबारा सरकार बनाई और पार्टी नेतृत्व ने एक बार फिर धामी पर विश्वास जताते हुए उन्हें मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी। लगातार दूसरे कार्यकाल में भी उन्होंने सरकार का नेतृत्व जारी रखा और अब मुख्यमंत्री के रूप में पांच वर्ष पूरे कर नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने कार्यकाल में कई ऐसे फैसले लिए, जिन्हें पहले केवल राजनीतिक चर्चा का विषय माना जाता था। उन्होंने कठिन और संवेदनशील मुद्दों पर निर्णय लेने से परहेज नहीं किया। नकल विरोधी कानून लागू करना, भू-माफियाओं के खिलाफ अभियान चलाना, धर्मांतरण विरोधी कानून को लागू करना, भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाना और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने जैसे फैसलों ने उनकी कार्यशैली को अलग पहचान दिलाई। इन कदमों से उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार कठिन निर्णय लेने से पीछे नहीं हटेगी।

धामी सरकार का सबसे चर्चित और ऐतिहासिक फैसला समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करना माना जाता है। लंबे समय से जिस विषय पर केवल बहस होती रही, उसे सरकार ने कानूनी रूप देकर लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया। इसके अलावा राज्य में कानून व्यवस्था, निवेश, धार्मिक पर्यटन, बुनियादी ढांचे और रोजगार से जुड़े कई क्षेत्रों में भी सरकार ने अपनी प्राथमिकताएं तय कीं। इन फैसलों ने मुख्यमंत्री धामी को राष्ट्रीय स्तर पर भी अलग पहचान दिलाई और उनके नेतृत्व की चर्चा अन्य राज्यों तक पहुंची।

भारतीय जनता पार्टी के लिए भी यह उपलब्धि विशेष महत्व रखती है। उत्तराखंड में भाजपा के कई मुख्यमंत्री जैसे भगत सिंह कोश्यारी, भुवन चंद्र खंडूरी, रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए थे। ऐसे में पुष्कर सिंह धामी भाजपा के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बन गए हैं जिन्होंने लगातार पांच वर्षों तक मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी निभाते हुए पार्टी के भीतर नेतृत्व की स्थिरता का नया उदाहरण पेश किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह उपलब्धि न केवल धामी के व्यक्तिगत नेतृत्व को मजबूत करती है, बल्कि उत्तराखंड की राजनीति में स्थिर शासन और निर्णायक नेतृत्व की नई पहचान भी स्थापित करती है।

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