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रुद्रप्रयाग में CCTV कैमरे क्षतिग्रस्त होने पर विवाद, पुलिसकर्मियों पर लगे आरोप; जांच की मांग तेज

रुद्रप्रयाग। केदार घाटी के ऊखीमठ क्षेत्र में मुख्य मार्ग पर लगे सीसीटीवी कैमरों के क्षतिग्रस्त होने की घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर विवाद गहरा गया है। घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद व्यापारियों, ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। वायरल वीडियो और स्थानीय आरोपों के आधार पर कुछ लोगों ने इस घटना में पुलिसकर्मियों की कथित भूमिका होने का दावा किया है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्य सड़क की निगरानी के लिए लगाए गए कुछ सीसीटीवी कैमरे क्षतिग्रस्त पाए गए। घटना के बाद क्षेत्र में नाराजगी का माहौल है और कई लोगों ने प्रशासन से पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराने की मांग की है। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में भी कथित तौर पर कैमरों को नुकसान पहुंचाने की बात कही जा रही है, जिसकी सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।

कुछ स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र में अवैध शराब के कारोबार से जुड़े मामलों को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। उनका दावा है कि हाल के दिनों में अवैध शराब की कथित बिक्री से जुड़े कुछ वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए थे। इसके बाद सीसीटीवी कैमरों के क्षतिग्रस्त होने की घटना ने लोगों की शंकाओं को और बढ़ा दिया है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि किसी आधिकारिक जांच रिपोर्ट से नहीं हुई है। वायरल वीडियो के संदर्भ में यह भी दावा किया जा रहा है कि ऊखीमठ क्षेत्र में स्थित एक मेडिकल स्टोर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों को नुकसान पहुंचाया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन कैमरों के माध्यम से मुख्य सड़क की गतिविधियों पर नजर रखी जाती थी। घटना के बाद आसपास के व्यापारियों ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता व्यक्त की है।

इस घटनाक्रम के बीच स्थानीय नागरिकों और महिला समूहों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि किसी भी व्यक्ति या अधिकारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। क्षेत्र में लंबे समय से नशे और अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलाने वाले सामाजिक संगठनों ने भी मामले को गंभीरता से लेने की अपील की है। स्थानीय लोगों ने कहा कि यदि समयबद्ध और निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने पर विचार कर सकते हैं। वहीं, पुलिस या जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक जांच अथवा आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।फिलहाल यह मामला जांच और आरोपों के स्तर पर है। वायरल वीडियो, स्थानीय दावों और अन्य तथ्यों की सत्यता की पुष्टि संबंधित एजेंसियों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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