Deprecated: Function WP_Dependencies->add_data() was called with an argument that is deprecated since version 6.9.0! IE conditional comments are ignored by all supported browsers. in /home/u141101890/domains/uttaranchalratna.com/public_html/wp-includes/functions.php on line 6170

सरकारी अधिकारियों के लिए नई व्यवस्था लागू, सेवा मामलों में NOC होगी जरूरी

हरियाणा सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से ग्रुप ‘ए’ और ग्रुप ‘बी’ अधिकारियों के लिए नया नियम लागू किया है। अब इन अधिकारियों से जुड़े महत्वपूर्ण सेवा मामलों में विजिलेंस क्लियरेंस प्राप्त करना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से निर्णय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और प्रशासनिक कार्यों में अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अब पेंशन, सेवानिवृत्ति, पदोन्नति, सरकारी कर्मचारियों को पासपोर्ट जारी करने, प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) और राज्य सरकार द्वारा निर्धारित अन्य महत्वपूर्ण सेवा मामलों में विजिलेंस क्लियरेंस या एनओसी के बिना कोई भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। इसके लिए सभी विभागों, बोर्डों, निगमों और सरकारी संस्थाओं में एक समान प्रक्रिया लागू की गई है।

सरकार ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे निर्धारित प्रारूप में अधिकारियों से संबंधित पूरी और सत्यापित जानकारी समय पर उपलब्ध कराएं। इसमें अधिकारी की नियुक्ति, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति, सेवा रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक विवरण शामिल होंगे। गलत जानकारी देने या तथ्यों को छिपाने के मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। सेवानिवृत्ति से जुड़े मामलों में सरकार ने विशेष प्रावधान किया है। विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि पेंशन संबंधी लाभों में किसी प्रकार की देरी न हो, इसके लिए विजिलेंस क्लियरेंस का प्रस्ताव अधिकारी की सेवानिवृत्ति की तिथि से कम-से-कम एक वर्ष पहले भेजना अनिवार्य होगा। इससे समय रहते जांच पूरी कर आवश्यक मंजूरी जारी की जा सकेगी।

नई व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को सौंपी गई है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी पात्र मामले में विजिलेंस क्लियरेंस प्राप्त किए बिना आगे की प्रक्रिया पूरी न की जाए। साथ ही सभी प्रस्ताव निर्धारित समय-सीमा के भीतर सतर्कता विभाग को भेजे जाएं। सतर्कता विभाग का कहना है कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य निवारक सतर्कता प्रणाली को मजबूत करना, सभी सरकारी संस्थानों में एक समान मानक लागू करना और प्रक्रियागत कमियों के कारण सेवा मामलों में होने वाली अनावश्यक देरी को समाप्त करना है। सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले से प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता पहले से अधिक मजबूत होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *