
उत्तराखंड की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और दुखद खबर सामने आई है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी का मंगलवार सुबह निधन हो गया। उनके निधन की पुष्टि उनकी बेटी और विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण ने की। बीसी खंडूरी लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और देहरादून के मैक्स अस्पताल में उनका इलाज जारी था। जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह करीब 11 बजकर 10 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि हार्ट अटैक की वजह से उनका निधन हुआ। कुछ दिन पहले उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट से हटाकर आईसीयू ऑब्जर्वेशन में रखा गया था, लेकिन उनकी हालत में लगातार गिरावट बनी हुई थी।
बीसी खंडूरी के निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी पूर्व मुख्यमंत्री के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। उनका पूरा जीवन राष्ट्रहित और जनसेवा को समर्पित रहा।
सीएम धामी ने कहा कि राजनीतिक जीवन में बीसी खंडूरी ने उत्तराखंड में सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार राजनीति की मजबूत पहचान बनाई। उन्होंने प्रदेश के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए और अपनी सादगी, स्पष्टवादिता व कार्यकुशलता के कारण जनता के बीच विशेष सम्मान हासिल किया। मुख्यमंत्री ने उनके निधन को उत्तराखंड ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी अपूरणीय क्षति बताया।
बता दें कि बीसी खंडूरी भारतीय सेना में करीब 35 वर्षों तक सेवाएं देने के बाद मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और भारतीय जनता पार्टी से जुड़ गए। गढ़वाल संसदीय सीट से सांसद चुने जाने के साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में भी अहम जिम्मेदारियां निभाईं। सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में भी बीसी खंडूरी ने साफ-सुथरी छवि वाले नेता के तौर पर पहचान बनाई। भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख और प्रशासनिक अनुशासन को लेकर उनकी कार्यशैली काफी चर्चित रही। उनके निधन से उत्तराखंड ने एक अनुभवी राजनेता और प्रेरणादायक व्यक्तित्व को खो दिया है।