संयुक्त किसान मोर्चा (पॉलिटिकल) की ओर से चंडीगढ़ में 1 से 7 सितंबर तक प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन को प्रशासन ने मंजूरी दे दी है। किसान संगठन यह प्रदर्शन सेक्टर-48 और 49 के बीच एयरपोर्ट रोड के पास करेंगे। प्रशासन से अनुमति मिलने के बाद अब किसान संगठनों ने धरने की तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में किसानों के पहुंचने की संभावना है, जिसे देखते हुए पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर भी तैयारियां की जा रही हैं। धरने की अनुमति मिलने से पहले किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने चंडीगढ़ की एसएसपी कंवरदीप कौर से मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में प्रशासन की ओर से प्रदर्शन के लिए निर्धारित नियमों और शर्तों के बारे में भी किसान नेताओं को जानकारी दी गई। इसके बाद राजेवाल ने कहा कि किसान जत्थेबंदियां प्रशासन के सभी निर्देशों का पालन करेंगी और धरने को शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाएगा। बलबीर सिंह राजेवाल ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के दौरान किसी भी कीमत पर कानून-व्यवस्था बिगड़ने नहीं दी जाएगी। किसान संगठनों की कोशिश रहेगी कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे और आम लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर प्रदर्शन किया जाएगा और तय नियमों का उल्लंघन नहीं किया जाएगा। किसानों की ओर से भीड़ को नियंत्रित रखने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी इंतजाम किए जाएंगे।
संयुक्त किसान मोर्चा (पॉलिटिकल) के अनुसार, इस धरने का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार के सामने किसानों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को मजबूती से उठाना है। किसानों की प्रमुख मांग फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी की कानूनी गारंटी है। किसान संगठनों का कहना है कि केवल एमएसपी घोषित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों को उनकी फसलों के लिए कानूनी तौर पर न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि उन्हें बाजार में अपनी उपज बेचते समय उचित दाम मिल सके। इसके अलावा किसान संगठन भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट को रद्द करने की मांग भी उठाएंगे। किसान नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार की व्यापार नीतियों और अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लेकर किसानों के बीच लगातार चिंता बनी हुई है। उनका मानना है कि ऐसे समझौतों का असर कृषि क्षेत्र, फसलों के बाजार और किसानों की आय पर पड़ सकता है। इसी वजह से धरने के दौरान इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा और केंद्र सरकार से अपनी मांगों पर स्पष्ट निर्णय लेने की अपील की जाएगी।
राजेवाल ने कहा कि किसानों में केंद्र सरकार से जुड़े इन मुद्दों को लेकर लगातार विरोध और नाराजगी बनी हुई है। संयुक्त किसान मोर्चा (पॉलिटिकल) इसी विरोध को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से सरकार तक पहुंचाने के लिए चंडीगढ़ में धरना आयोजित कर रहा है। किसान नेताओं का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान सरकार से किसानों की मांगों पर बातचीत और ठोस समाधान की दिशा में कदम उठाने की मांग की जाएगी। 1 सितंबर से शुरू होने वाला यह धरना 7 सितंबर तक चलेगा। यानी करीब एक सप्ताह तक किसान चंडीगढ़ में अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाएंगे। प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद अब किसान संगठनों की ओर से कार्यकर्ताओं और किसानों को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए तैयार किया जा रहा है। अलग-अलग किसान जत्थेबंदियों के प्रतिनिधियों के भी धरने में पहुंचने की उम्मीद है। वहीं, प्रदर्शन को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस और प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था के साथ-साथ ट्रैफिक मैनेजमेंट की भी बड़ी चुनौती रहेगी। एयरपोर्ट रोड के पास धरना होने के कारण इस मार्ग पर यातायात प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में पुलिस की ओर से ट्रैफिक को नियंत्रित करने, जरूरत पड़ने पर रूट डायवर्ट करने और आम लोगों की आवाजाही को सुचारु बनाए रखने के लिए आवश्यक व्यवस्था की जाएगी। किसान नेताओं ने प्रशासन को भरोसा दिलाया है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा और निर्धारित स्थान व नियमों के अनुसार ही किया जाएगा। अब प्रशासन की मंजूरी के बाद किसान संगठनों की नजर अपनी मांगों को केंद्र सरकार तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने पर है। 1 सितंबर से शुरू होने वाले इस धरने के दौरान एमएसपी की कानूनी गारंटी और भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट जैसे मुद्दे किसानों के आंदोलन के केंद्र में रहेंगे।